अहमदाबाद/नीमच। जहाँ एक ओर कलियुग के इस दौर में लोग अपनों का साथ देने से भी कतराते हैं, वहीं मध्य प्रदेश के नीमच की एक साहसी महिला ने त्याग, ममता और मानवता की अद्भुत मिसाल पेश की है। नीमच (मध्य प्रदेश) के डाइट (DIET) संस्थान में व्याख्याता के रूप में कार्यरत गायत्री सापेड़िया ने अपने गंभीर रूप से बीमार भांजे को अपनी किडनी दान कर उसे नया जीवन प्रदान किया। उनके इस निस्वार्थ और साहसिक निर्णय ने न केवल एक परिवार को टूटने से बचाया, बल्कि समाज में मानवता और रिश्तों की संवेदना को भी नई प्रेरणा दी है।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर अंगदान चैरिटेबल ट्रस्ट तथा शेल्बी मल्टी-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल्स द्वारा एक विशेष सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। अहमदाबाद मैनेजमेंट एसोसिएशन (AMA) के एच.टी. पारेख हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम की थीम “She Gave Life Beyond Life” रखी गई थी। इस समारोह में उन निस्वार्थ महिलाओं और उनके परिवारों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने अंगदान जैसे साहसिक निर्णय के माध्यम से दूसरों को नया जीवन प्रदान किया है।
गायत्री सापेड़िया, मनोज सापेड़िया की धर्मपत्नी, प्रसिद्ध शिक्षाविद् स्व. श्री बलराज सापेड़िया की पुत्रवधू तथा प्रख्यात ज्योतिषाचार्य व शिक्षाविद् पंडित कमलाशंकर आचार्य की सुपुत्री हैं। अपने इस मानवीय और प्रेरणादायक कार्य से उन्होंने अपने मायके और ससुराल—दोनों ही परिवारों का गौरव बढ़ाया है।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर अहमदाबाद में आयोजित इस भव्य समारोह में उन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि गुजरात की शिक्षा राज्य मंत्री रिवाबा जडेजा तथा प्रसिद्ध गायिका किंजल बेन दवे ने गायत्री सापेड़िया के साहस, संवेदनशीलता और मानवता की भावना की मुक्तकंठ से सराहना की।
कार्यक्रम के दौरान यह बात विशेष रूप से चर्चा का विषय रही कि एक मामीजी द्वारा अपने भांजे के प्रति प्रदर्शित यह त्याग और ममता आज के समय में अत्यंत दुर्लभ है। समारोह में उन्हें “Honour of Your Selfless Gift” ट्रॉफी प्रदान कर सम्मानित किया गया।
गायत्री जी के इस प्रेरणादायक कदम ने यह सिद्ध कर दिया कि एक शिक्षित और सशक्त महिला न केवल समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, बल्कि मानवता की रक्षा के लिए महान त्याग करने का साहस भी रखती है। उनके इस साहसिक निर्णय से आज पूरा नीमच शहर और मध्य प्रदेश स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा है।
अपने संबोधन में मुख्य अतिथि रिवाबा जडेजा ने कहा कि महिलाएँ केवल जीवन देने वाली ही नहीं होतीं, बल्कि अंगदान के माध्यम से किसी को नया जीवन देने की शक्ति भी रखती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रेरणादायक उदाहरण समाज में नई चेतना उत्पन्न करते हैं और अंगदान के प्रति लोगों की झिझक को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अपने संक्षिप्त उद्बोधन में गायत्री सापेड़िया ने भी अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि अंगदान से किसी प्रकार की कमजोरी या परेशानी नहीं होती। उन्होंने स्वयं को सौभाग्यशाली बताया कि ईश्वर ने उन्हें किसी को नया जीवन देने का माध्यम बनने का अवसर दिया। साथ ही उन्होंने अपने पूरे परिवार का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने उनके इस निर्णय का पूर्ण समर्थन किया।
इस अवसर पर शेल्बी हॉस्पिटल्स के वरिष्ठ अधिकारी, अंगदान चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रतिनिधि तथा शहर के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन इस सामूहिक संकल्प के साथ हुआ कि अंगदान के इस महाअभियान को समाज में और अधिक व्यापक बनाया जाएगा।