रतलाम। हौसले बुलंद हों और मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो राह की हर बाधा छोटी पड़ जाती है। इसका जीता-जागता उदाहरण रतलाम जिले के ग्राम बोरदा की बेटी प्रिया कुंवर सिसौदिया हैं। एक साधारण किसान परिवार में जन्मी प्रिया ने संघर्ष और मेहनत के दम पर शिक्षा, वकालत और राजनीति के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। प्रिया के पिता ने कठिन परिश्रम और पसीने की कमाई से उन्हें पढ़ाया-लिखाया। उन्होंने शासकीय विद्यालय से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद भगतसिंह शासकीय महाविद्यालय जावरा से बी.कॉम और एम.कॉम की डिग्री हासिल की। कॉलेज के समय से ही वे सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहीं, जिससे समाज सेवा का भाव उनके भीतर मजबूत होता गया। पारिवारिक परिस्थितियों के बावजूद प्रिया ने हार नहीं मानी और आगे बढ़ते हुए एलएलबी की पढ़ाई पूरी कर कानून की बारीकियों को समझा। इसके बाद उन्होंने राजनीति को समाज सेवा का माध्यम मानते हुए जनपद पंचायत जावरा के वार्ड क्रमांक 17 से सदस्य पद के लिए चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया। मध्यमवर्गीय परिवार से होने के कारण संसाधनों की कमी और कई चुनौतियां सामने थीं, लेकिन जनता ने उनकी मेहनत और ईमानदारी पर भरोसा जताया। परिणामस्वरूप प्रिया ने पूरे जनपद में सर्वाधिक मतों से ऐतिहासिक जीत दर्ज की। उनकी योग्यता और कार्यशैली को देखते हुए उन्हें निर्माण समिति का अध्यक्ष भी बनाया गया। वर्तमान में प्रिया कुंवर सिसौदिया जावरा न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में सेवाएं दे रही हैं और राजनीति के माध्यम से समाज में विशेषकर महिलाओं की आवाज बुलंद कर रही हैं। महिला सशक्तिकरण के अवसर पर उन्होंने समाज से अपील करते हुए कहा कि बेटियों को बोझ न समझें, उन्हें अच्छी शिक्षा दें और उनके सपनों को साकार करने में सहयोग करें। उनका मानना है कि जब बेटियों को अवसर मिलता है, तो वे परिवार ही नहीं बल्कि पूरे समाज का नाम रोशन करती हैं।