नीमच। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जन शौर्य सोशल वेलफेयर एंड डेवलपमेंट सोसाइटी, नीमच एवं म.प्र. डे-ए-वाई राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के संयुक्त तत्वावधान में जनपद पंचायत सभाकक्ष में एक प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में नीमच जिले के बांछड़ा समुदाय के विभिन्न गांवों से आई स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता के संदेश के साथ हुई। जन शौर्य संस्था के डायरेक्टर आकाश चौहान ने उपस्थित महिलाओं को संबोधित करते हुए अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के महत्व को समझाया और कहा कि यह दिन महिलाओं के अधिकार, सम्मान और समान अवसरों की आवाज को मजबूत करने का दिन है। उन्होंने कहा कि बांछड़ा समुदाय की महिलाएं आज जिस साहस के साथ शिक्षा, स्वरोजगार और सम्मानजनक जीवन की ओर कदम बढ़ा रही हैं, वह पूरे समाज के लिए प्रेरणा है।
इस अवसर पर राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला परियोजना प्रबंधक श्री शंभू सिंह मइडा ने महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों की ताकत के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि महिलाएं हर माह मात्र 100 रुपये की बचत से अपने समूह को मजबूत बना सकती हैं और तीन माह बाद शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से ऋण प्राप्त कर छोटा उद्योग शुरू कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनती हैं, तब वे न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे समाज में सकारात्मक बदलाव की मिसाल बनती हैं।
कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग, नीमच की अधिकारी सुश्री अंकित पांड्या ने भी महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि शासन द्वारा महिलाओं और बालिकाओं के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनका लाभ उठाकर महिलाएं अपने जीवन को नई दिशा दे सकती हैं। उन्होंने महिलाओं से आगे बढ़कर इन योजनाओं का लाभ लेने और आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का सबसे भावनात्मक और प्रेरणादायक क्षण वह रहा जब स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से स्वरोजगार शुरू कर अपने गांव में आत्मनिर्भर बनी 25 महिलाओं को प्रशंसा प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। इन महिलाओं ने अपने साहस और मेहनत से यह साबित किया है कि यदि अवसर और संकल्प मिले तो बदलाव संभव है।
कार्यक्रम में उपस्थित सभी महिलाओं ने यह संकल्प लिया कि वे समाज में फैली कुरीतियों को पीछे छोड़कर शिक्षा, आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक जीवन की राह पर आगे बढ़ेंगी तथा अपने गांव की अन्य महिलाओं और बालिकाओं के लिए प्रेरणा बनेंगी।
यह कार्यक्रम न केवल महिला सशक्तिकरण का उत्सव था, बल्कि बांछड़ा समुदाय की महिलाओं के भीतर जाग रहे आत्मविश्वास और बदलाव की एक नई उम्मीद का प्रतीक भी बना।