मुख्यमंत्री Mohan Yadav के नेतृत्व वाली मध्य प्रदेश सरकार ने होली के दौरान 6300 करोड़ रुपए का कर्ज लेने के बाद मंगलवार को फिर तीन नए कर्ज लेने का फैसला किया है। इन तीनों कर्जों की कुल राशि 5800 करोड़ रुपए है, जिसका भुगतान बुधवार को किया जाएगा।
इन नए कर्जों के साथ चालू वित्त वर्ष में राज्य सरकार द्वारा लिए गए कुल कर्ज का आंकड़ा बढ़कर करीब 84,900 करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगा। वहीं प्रदेश पर कुल देनदारी बढ़कर लगभग 5 लाख 6 हजार 640 करोड़ रुपए हो जाएगी।
सरकार द्वारा लिए जा रहे 5800 करोड़ रुपए के कर्ज में अलग-अलग अवधि के बॉन्ड शामिल हैं। इसमें
1900 करोड़ रुपए का कर्ज 10 साल के लिए
1700 करोड़ रुपए का कर्ज 14 साल के लिए
2200 करोड़ रुपए का कर्ज 21 साल की अवधि के लिए लिया जा रहा है।
मंगलवार को Reserve Bank of India के ई-कुबेर प्लेटफॉर्म के माध्यम से मध्य प्रदेश सहित कई राज्य सरकारें बॉन्ड की नीलामी कर कुल 45,960 करोड़ रुपए का कर्ज लेंगी। इस नीलामी में Karnataka 10 हजार करोड़ और Tamil Nadu 8 हजार करोड़ रुपए की उधारी लेगा।
केंद्र सरकार भी राज्यों को पूंजीगत खर्च बढ़ाने के लिए 50 साल का ब्याज-मुक्त कर्ज उपलब्ध करा रही है। इसी कारण राज्यों ने वित्त वर्ष की पहली तिमाही से ही ज्यादा उधारी लेना शुरू कर दिया है।
मध्य प्रदेश में योजनाओं, उद्योग और कृषि में निवेश के साथ ही पुराने कर्ज के मूलधन और ब्याज के भुगतान के लिए भी बड़ी राशि की आवश्यकता बताई जा रही है।
होली से एक दिन पहले राज्य सरकार ने चार अलग-अलग कर्ज लेकर कुल 6300 करोड़ रुपए जुटाए थे। वित्त विभाग के नोटिफिकेशन के अनुसार—
1800 करोड़ रुपए (9 साल)
1600 करोड़ रुपए (13 साल)
1300 करोड़ रुपए (15 साल)
1600 करोड़ रुपए (23 साल)
यह एक ही दिन में चालू वित्त वर्ष का सबसे बड़ा कर्ज माना गया।
इससे पहले 17 फरवरी को भी राज्य सरकार ने चार अलग-अलग कर्ज लिए थे—
1200 करोड़ रुपए (8 साल)
1400 करोड़ रुपए (13 साल)
1600 करोड़ रुपए (19 साल)
1400 करोड़ रुपए (23 साल)
इन सभी कर्जों की अदायगी हर छह महीने में ब्याज भुगतान के साथ की जाएगी।
31 मार्च 2025 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में मध्य प्रदेश पर कुल कर्ज 4 लाख 21 हजार 740 करोड़ रुपए था, जो अब लगातार नई उधारी के कारण तेजी से बढ़ता जा रहा है।