देवास। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) नियमों को लेकर प्रदेश में विवाद खड़ा हो गया है। मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के नाम कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।
संघ का कहना है कि लोक शिक्षण संचालनालय, भोपाल द्वारा जारी एक पत्र के कारण प्रदेश के लाखों शिक्षकों में असमंजस और आक्रोश की स्थिति बन गई है। यह पत्र विशेष रूप से उन शिक्षकों को प्रभावित कर रहा है, जो लंबे समय से सेवा में कार्यरत हैं।
20दृ25 साल से सेवा दे रहे शिक्षक प्रभावित
ज्ञापन में बताया गया है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई एक्ट 2009) के तहत टीईटी परीक्षा केवल नई नियुक्तियों के लिए अनिवार्य की गई थी। प्रदेश में कई शिक्षक ऐसे हैं जो पिछले 20 से 25 वर्षों से सेवा दे रहे हैं और उनकी नियुक्ति उस समय के नियमों के अनुसार हुई थी।
सेवा शर्तों में बदलाव नहीं किया जा सकता
कर्मचारी संघ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार किसी भी कर्मचारी की नियुक्ति के बाद उसकी सेवा शर्तों में बदलाव नहीं किया जा सकता। वर्तमान में टीईटी को अनिवार्य करना सेवा शर्तों में बदलाव माना जाएगा।
संघ ने सरकार से मांग की है कि लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी पत्र पर तत्काल रोक लगाई जाए। साथ ही शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर की जाए। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो प्रदेश के करीब 3 लाख शिक्षक प्रभावित हो सकते हैं।