सरवानिया महाराज। तिहत्तर ग्राम पंचायतों के विकास के लिए बनी जावद जनपद पंचायत में पिछले चार साल से बैठकों का अभाव बताया जा रहा है। पच्चीस जनपद सदस्यों और तिहत्तर सरपंचों वाली पंचायत में न तो सामान्य प्रशासन समिति की बैठक हुई है और न ही साधारण सभा की। इससे ग्राम पंचायतों में विकास कार्य धीमे पड़ गए हैं और छोटे-मोटे काम अटके हुए हैं।
जनपद सदस्य सुभाषचंद्र भट्ट ने कहा कि जनपद पंचायत के सीईओ राजनीतिक दबाव में हैं और बैठकें आयोजित नहीं करवा रहे। पंचायत सदस्यों की राशि वितरण भी समय पर नहीं हो रही। ग्राम पंचायत आमलीभाट के उपसरपंच हरिश तंवर ने बताया कि भ्रष्टाचार में लिप्त एक सचिव को हटाने के लिए प्रस्ताव पारित किया गया था, लेकिन वह अभी भी महत्वपूर्ण विभाग में कार्यरत है।
जनपद वार्ड क्रमांक 14 की सदस्य अनिता अर्जुन गूर्जर ने कहा कि साढ़े तीन साल में जनपद राशि केवल एक बार मिली है और पांच-पांच महीने से बैठकें नहीं हो रही हैं। सीईओ से लड़-झगड़कर बैठकें करवाई जाती हैं, लेकिन विकास कार्य की चर्चा टाल-मटोल कर की जाती है।
जनपद पंचायत की स्थिति को लेकर जिला कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ को भी अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। अधिकारी केवल उन्हीं कार्यों को प्राथमिकता दे रहे हैं जो उन्हें राजनीतिक रूप से निर्देशित किया गया।
इस मामले पर जनपद पंचायत सीईओ शैलेन्द्र सिंह ने बताया कि उन्हें चार्ज लिए साढ़े तीन महीने हो गए हैं। साधारण सभा और सामान्य प्रशासन समिति की पिछली बैठक ढाई महीने पहले हुई थी। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष से ऐजेण्डे की तारीख तय कर जल्द बैठक आयोजित की जाएगी। सचिव के मामले में जिला पंचायत को प्रतिवेदन भेजा जा चुका है और श्रम विभाग से हटाने की प्रक्रिया चल रही है।