नीमच। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य किए जाने के प्रस्ताव के विरोध में रविवार को गांधी वाटिका में जिले के शिक्षकों और अध्यापकों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों और शिक्षकों ने सरकार से पुनर्विचार की मांग की।
वक्ताओं ने कहा कि प्रदेश में कई शिक्षक पिछले 25-30 वर्षों से शासकीय विद्यालयों में सेवाएं दे रहे हैं और बेहतर परिणाम देकर शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाया है। ऐसे में वर्ष 2009 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्य करना न्यायसंगत नहीं है।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि इस विषय पर मध्यप्रदेश सरकार के खिलाफ सर्वाेच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर की जाएगी। साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि सरकार ने उचित कदम नहीं उठाए तो शिक्षकों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ सकता है।
बैठक में कंवरलाल नागदा, मनीष पुरोहित, भारत राठौर, विनोद राठौर, संजय नागोरी, परसराम रावत, समर्थ गोस्वामी, सईद खान सहित कई शिक्षक और पदाधिकारी उपस्थित रहे।