मुरैना। जिले में आज किसानों के गुस्से का गुबार फूट पड़ा, आगरा-ग्वालियर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे अब विकास की रफ्तार के बजाय विवादों के भंवर में फंस गया है,चंबल की माटी के किसान अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं,मांग सिर्फ एक ही है जब जमीन हमारी है तो मुआवजे में भेदभाव क्यों,यूपी और राजस्थान में चार गुना और एमपी में सिर्फ दो गुना,इसी अन्याय के खिलाफ आज कांग्रेस और माकपा के दिग्गज नेताओं के साथ हजारों किसानों ने कलेक्ट्रेट का घेराव किया,ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के लिए मुरैना जिले के कई गांवों की उपजाऊ जमीन ली जा रही है,इसी को लेकर किसानों में भारी आक्रोश है,किसानों के समर्थन में कांग्रेस और माकपा के नेता सड़कों पर उतर आए हैं,पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस से कलेक्ट्रेट तक विशाल रैली निकाली गई,किसानों का कहना है कि उनकी जमीन ही नहीं बल्कि खड़ी फसल भी ठेकेदार द्वारा पूरी तरह नष्ट कर दी गई, लेकिन उसका मुआवजा तक नहीं मिला, मुरैना की सड़कों पर उतरा यह जनसैलाब किसी चुनावी रैली का नहीं बल्कि अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे किसानों का है,आगरा से ग्वालियर तक बनने वाले ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे ने चंबल के किसानों की नींद उड़ा दी है,दर्जनों गांवों की उपजाऊ जमीन इस प्रोजेक्ट की भेंट चढ़ रही है लेकिन मुआवजे के नाम पर जो मिल रहा है,उसे किसान अन्याय बता रहे हैं,पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस से कलेक्ट्रेट तक निकली इस रैली में कांग्रेस के एक दर्जन से ज्यादा विधायक,पूर्व विधायक और माकपा के प्रदेश स्तरीय नेताओं ने शिरकत की,उनका कहना है कि सरसों और गेहूं की फसल भी बर्बाद कर दी गई है जिसका अलग से मुआवजा मिलना चाहिए, प्रशासन के आश्वासन के बाद रैली तो खत्म हो गई,लेकिन किसानों की चेतावनी बरकरार है,अगर सरकार ने जल्द ही मुआवजे की नीति में बदलाव नहीं किया तो चंबल की ये जमीन आने वाले दिनों में बड़े आंदोलन की गवाह बनेगी,अपर कलेक्टर अश्विनी रावत ने बताया कि किसानों और कांग्रेस नेताओं ने ज्ञापन सौंपा है। उनकी प्रमुख मांग मुआवजे की दर बढ़ाने की है,हमने आश्वस्त किया है कि ज्ञापन की प्रतिवेदन बनाकर सरकार को भेजी जाएगी,रही बात फसलों के नुकसान की तो उसका आकलन कर ठेकेदार से किसानों को हर्जाना दिलवाया जाएगा।