नीमच। केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) द्वारा गुरुवार को नीमच स्थित कैंपस में शौर्य दिवस पूरे सम्मान और गरिमा के साथ मनाया गया। यह दिन भारतीय वीरता और अदम्य साहस का प्रतीक है।
9 अप्रैल 1965 को ‘ऑपरेशन डेजर्ट हॉक’ के तहत पाकिस्तान की सेना ने गुजरात के रण ऑफ कच्छ क्षेत्र में भारतीय सीमा पर हमला किया था। उस समय सीआरपीएफ की द्वितीय बटालियन की मात्र दो कंपनियां सरदार और टॉक पोस्ट पर तैनात थीं। तड़के करीब 3.30 बजे पाकिस्तानी सेना की पूरी ब्रिगेड ने हमला किया, लेकिन सीमित संसाधनों के बावजूद भारतीय जवानों ने लगभग 12 घंटे तक बहादुरी से मुकाबला किया।
इस संघर्ष में सीआरपीएफ के जवानों ने दुश्मन को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। युद्ध में पाकिस्तान के 34 सैनिक मारे गए और 4 को जीवित पकड़ा गया, जबकि देश की रक्षा करते हुए सीआरपीएफ के 7 जवान वीरगति को प्राप्त हुए। इसी स्मृति में हर वर्ष 9 अप्रैल को शौर्य दिवस मनाया जाता है।
नीमच के सीआरपीएफ कैंपस स्थित त्रिगंजा शौर्य स्थल पर आयोजित कार्यक्रम में कमांडेंट प्रमोद कुमार साहू, आरटीसी कमांडेंट छुट्टन ठाकुर, सीटीसी कमांडेंट जितेंद्र कुमार गुप्ता, 4 सिग्नल बटालियन के कमांडेंट हरबिंदर सिंह और डॉ. संस्तृति शर्मा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी व जवान उपस्थित रहे। सभी ने पुष्पचक्र अर्पित कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
इस दौरान क्वार्टर गार्ड पर रण ऑफ कच्छ से लाई गई पवित्र माटी से भरे कलश पर माल्यार्पण किया गया। साथ ही मेंस क्लब में सैनिक सम्मेलन आयोजित कर शौर्य दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला गया तथा उत्कृष्ट कार्य करने वाले 5 कार्मिकों को डीजी डिस्क और प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के अंत में ‘बड़ा खाना’ का आयोजन किया गया, जिसमें अधिकारियों और जवानों ने एक साथ भोजन कर एकता और भाईचारे का संदेश दिया।