चित्तौड़गढ़। गांधीनगर निवासी लाड़कंवर पोखरना, धर्मपत्नी प्रकाश पोखरना एवं स्व. मोहनलाल पोखरना परिवार की वरिष्ठ सदस्य, का 1 अगस्त 2026 को जैन परंपरा के अनुसार चोविहार संथारा पूर्ण हुआ। उन्होंने प्रातः 5.15 बजे शांत भाव से देह त्याग कर अपनी आत्म साधना की पूर्णाहुति की।
जानकारी के अनुसार लाड़कंवर पोखरना पिछले लगभग दो वर्षों से अस्वस्थ थीं और उनका स्वास्थ्य लगातार गिर रहा था। जीवन के अंतिम चरण में उन्होंने आत्मकल्याण एवं आध्यात्मिक साधना के उद्देश्य से संथारा ग्रहण करने का दृढ़ संकल्प व्यक्त किया। उनके अटल निश्चय को देखते हुए परिवारजनों ने आपसी सहमति से उनकी इस धार्मिक भावना का सम्मान किया।
24 जुलाई 2026 को शांतक्रांति संघ नायक आचार्य श्री विजयराज जी महाराज साहब के आज्ञानुवर्ती विद्वान संत अभिनव मुनि महाराज एवं दिव्यम मुनि महाराज ने उन्हें विधिवत चोविहार संथारे के प्रत्याख्यान कराए, जिन्हें उन्होंने पूर्ण श्रद्धा एवं समझपूर्वक स्वीकार किया।
संथारा ग्रहण करने के बाद से उनका संपूर्ण समय धार्मिक वातावरण, जप, ध्यान एवं आत्मचिंतन में व्यतीत हुआ। अंततः 1 अगस्त की प्रातः उनकी आत्म साधना पूर्ण हुई और उन्होंने शांतचित्त भाव से नश्वर शरीर का त्याग कर जैन दर्शन की भावना के अनुरूप अपने आध्यात्मिक पथ की ओर प्रस्थान किया।
उल्लेखनीय है कि पोखरना परिवार जैन धर्म के प्रति गहरी आस्था रखने वाला परिवार है तथा आचार्य श्री विजयराज जी महाराज के प्रति उनकी विशेष श्रद्धा एवं भक्ति रही है। लाड़कंवर पोखरना के संथारा पूर्ण होने पर समाजजनों ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके आत्मकल्याण की मंगलकामना की।