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May 13, 2026, 12:25 pm
KHABAR : मंडला जिला अस्पताल की बदहाली हाईकोर्ट पहुंची, 10 लाख आबादी पर 17 डॉक्टर, प्रसूति वार्ड में फर्श पर लेट रहीं महिलाएं, सरकार से मांगा जवाब, पढे़ खबर

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जबलपुर। मंडला जिला अस्पताल की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में आदिवासी बाहुल्य जिले में इलाज की गंभीर बदइंतजामी, डॉक्टरों की भारी कमी और प्रसूति वार्ड की दयनीय स्थिति को लेकर सवाल उठाए गए हैं।


मंगलवार को मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार, स्वास्थ्य विभाग और मंडला सीएमएचओ को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई जून में होगी।


याचिकाकर्ता पंकज कुमार सोनी ने हाईकोर्ट को बताया कि मंडला जिले की आबादी करीब 10 लाख है, जिसमें लगभग 70 प्रतिशत आदिवासी समुदाय से हैं। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण अधिकांश लोग जिला अस्पताल पर ही निर्भर हैं, लेकिन वहां मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाओं का भी अभाव है।


42 पद स्वीकृत, सिर्फ 17 डॉक्टर तैनात
याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता धनंजय असाटी ने कोर्ट को बताया कि जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट और रेडियोलॉजिस्ट तक उपलब्ध नहीं हैं। किसी मरीज को गंभीर समस्या होने पर उसे नागपुर या जबलपुर रेफर करना पड़ता है। अस्पताल में डॉक्टरों के 42 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 17 डॉक्टर ही पदस्थ हैं।


याचिका में बताया गया कि अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, यूरोलॉजिस्ट और रेडियोलॉजिस्ट जैसे विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद वर्षों से खाली पड़े हैं। रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने से अस्पताल की सोनोग्राफी मशीनें भी बंद पड़ी हैं, जिससे मरीजों को निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों में महंगे टेस्ट कराने पड़ रहे हैं।


प्रसूति वार्ड में फर्श पर लेटने को मजबूर महिलाएं
याचिका में प्रसूति वार्ड की स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया गया है। आरोप है कि बिस्तरों की भारी कमी के चलते गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को फर्श पर लेटना पड़ रहा है। इससे संक्रमण और गंभीर स्वास्थ्य जोखिम बढ़ रहे हैं, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार का उल्लंघन है।


प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल
याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए गए, प्रशासन को ज्ञापन और कानूनी नोटिस भी दिए गए, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। याचिका में राज्य सरकार की प्रशासनिक चुप्पी पर भी सवाल उठाए गए हैं।


याचिका में ये प्रमुख मांगें की गईं
याचिका संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 47 के उल्लंघन को आधार बनाकर दायर की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता धनंजय असाटी और रामकिशोर शिवहरे पैरवी कर रहे हैं।


प्रसूति वार्ड में तत्काल अतिरिक्त बिस्तरों की व्यवस्था
विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद समयबद्ध तरीके से भरना
स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई

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