चित्तौड़गढ़। आचार्य भगवन 108 विद्यासागर जी महामुनिराज की शिष्या आर्यिका 105 श्रुतमति माताजी एवं आर्यिका 105 उपशममति माताजी का 20 मई 2026 को रीवा (म.प्र.) में एक सड़क हादसे में असामयिक देवलोकगमन हो गया। इस घटना के विरोध में सकल जैन समाज द्वारा मौन जुलूस निकाला गया।
समाजजनों ने बताया कि घटना स्थल के वीडियो फुटेज एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह मामला संदिग्ध प्रतीत होता है, जिसके चलते इसकी निष्पक्ष, पारदर्शी एवं उच्च स्तरीय जांच आवश्यक है।
संतों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त
जैन साधु-संत निहत्थे, अहिंसक एवं पैदल विहार करने वाले तपस्वी होते हैं, जो किसी प्रकार की सुरक्षा अथवा भौतिक साधनों का उपयोग नहीं करते। ऐसे में संतों के साथ बढ़ती दुर्घटनाएं एवं हमले समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं।
तीन प्रमुख मांगें रखीं गईं
सकल दिगंबर जैन समाज के महामंत्री एवं श्री महावीर जैन मंडल के उपाध्यक्ष डॉ. ज्ञानसागर जैन ने बताया कि समाज द्वारा निम्न मांगें रखी गईं-
घटना की उच्च स्तरीय जांच: प्रकरण की SIT अथवा न्यायिक जांच कराई जाए तथा CCTV, वीडियो एवं डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए। दोषियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
संत सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किया जाए: विहार मार्गों पर प्रशासनिक समन्वय, संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस सहयोग, ट्रैफिक नियंत्रण एवं चेतावनी संकेतक तथा हाइवे व भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में विशेष सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति बनाई जाए: भारत सरकार द्वारा पैदल विहार करने वाले संतों के लिए राष्ट्रीय गाइडलाइन एवं सुरक्षा SOP तैयार की जाए तथा संतों से जुड़े अपराधों को विशेष संवेदनशील श्रेणी में रखा जाए।
प्रशासन-समाज समन्वय की मांग
समाज ने प्रशासन एवं समाज के बीच समन्वय तंत्र स्थापित करने तथा स्थानीय स्तर पर आपातकालीन संपर्क व्यवस्था बनाने की भी मांग की है।
मौन जुलूस में बड़ी संख्या में समाजजन शामिल
यह मौन जुलूस महावीर जैन मंडल एवं सकल दिगंबर जैन समाज चित्तौड़गढ़ के तत्वावधान में आयोजित किया गया। इसमें विभिन्न पदाधिकारी एवं समाजजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखीं।