सरवानिया महाराज। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) प्रकरण में 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार से आवश्यक विधायी एवं नीतिगत हस्तक्षेप की मांग की है। महासंघ द्वारा 18 जून 2026 को देशभर में जिला कलेक्टरों के माध्यम से प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे जाएंगे।
मध्य प्रदेश शिक्षक संघ के प्रांतीय संगठन मंत्री हिम्मत सिंह जैन ने बताया कि संगठन सर्वाेच्च न्यायालय के निर्णय का पूर्ण सम्मान करता है, लेकिन 23 अगस्त 2010 से पूर्व वैध नियमों एवं पात्रताओं के आधार पर नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से स्थायी रूप से मुक्त किए जाने की मांग कर रहा है।
महासंघ की प्रमुख मांगों में ऐसे शिक्षकों की सेवा, वरिष्ठता, पदोन्नति एवं अन्य सभी सेवा लाभों को पूर्ण संरक्षण प्रदान करना, आवश्यकता पड़ने पर संसद में विधायी संशोधन या विशेष प्रावधान लाना तथा सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर शिक्षकों में व्याप्त असमंजस और असुरक्षा की स्थिति का निराकरण करना शामिल है।
हिम्मत सिंह जैन ने कहा कि संगठन के आकलन के अनुसार देशभर में लाखों शिक्षक इस विषय से प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षक मानसिक तनाव और असुरक्षा की स्थिति में रहेंगे तो इसका प्रभाव शिक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों पर भी पड़ेगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन न्यायालय के निर्णय का विरोध नहीं कर रहा है, बल्कि सरकार से संवैधानिक अधिकारों का उपयोग कर उन शिक्षकों को राहत देने की मांग कर रहा है, जिनकी नियुक्तियां उस समय लागू नियमों के अनुरूप हुई थीं। यह मांग सामाजिक न्याय, समानता और विधिक निश्चितता के सिद्धांतों पर आधारित है।
उन्होंने बताया कि 18 जून को ज्ञापन सौंपने के बाद संगठन का प्रतिनिधिमंडल संबंधित पक्षों से भेंट कर इस विषय के समाधान के लिए आगे भी प्रयास करेगा। महासंघ ने विश्वास व्यक्त किया है कि केंद्र सरकार लाखों शिक्षकों और उनके परिवारों की चिंता को देखते हुए संवेदनशीलता के साथ आवश्यक कदम उठाएगी।