नीमच। प्रतिभा किसी संसाधन या बड़े शहर की मोहताज नहीं होती, यह बात जिले के छोटे से गांव लखमी की बेटी भानुप्रिया बैरागी ने साबित कर दिखाया है। साधारण परिवार से आने वाली भानुप्रिया का चयन मध्यप्रदेश सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर हुआ है। उनकी इस उपलब्धि से पूरे गांव और क्षेत्र में हर्ष का माहौल है।
जिला मुख्यालय से लगभग 18 से 20 किलोमीटर दूर स्थित लखमी गांव के एक साधारण बैरागी परिवार में जन्मी भानुप्रिया के पिता पूजा-अर्चना का कार्य करते हैं, जबकि उनकी माता एक निजी अस्पताल में सेवा देकर परिवार का भरण-पोषण करती हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद माता-पिता ने अपनी बेटी को बेहतर शिक्षा दिलाने में कोई कमी नहीं छोड़ी।
भानुप्रिया बचपन से ही मेधावी छात्रा रही हैं। उनकी मां आशा बैरागी ने बेटी के उज्ज्वल भविष्य का सपना देखा और उसे पूरा करने के लिए दिन-रात मेहनत की। उच्च शिक्षा के लिए भानुप्रिया को इंदौर भेजा गया, जहां उन्होंने पूरी लगन और मेहनत के साथ अध्ययन किया।
माता-पिता के संघर्ष और विश्वास को भानुप्रिया ने अपनी सफलता में बदल दिया। लगातार परिश्रम और समर्पण के बल पर उन्होंने मध्यप्रदेश सिविल सेवा परीक्षा में सफलता प्राप्त करते हुए असिस्टेंट प्रोफेसर पद हासिल किया।
भानुप्रिया की सफलता से परिवार सहित पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई है। ग्रामीण, रिश्तेदार और शुभचिंतक उन्हें बधाई देकर उज्ज्वल भविष्य की कामना कर रहे हैं।
भानुप्रिया की इस उपलब्धि ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो किसी भी परिस्थिति में सफलता प्राप्त की जा सकती है। उनकी सफलता आज क्षेत्र की बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।