नीमच/भोपाल। प्रदेश में मानसून की धीमी रफ्तार ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। समय पर बारिश नहीं होने से खरीफ सीजन की तैयारियां प्रभावित हो रही हैं और कई क्षेत्रों में बोवनी का कार्य अब तक शुरू नहीं हो सका है। विशेष रूप से बारिश आधारित खेती करने वाले किसानों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। पर्याप्त नमी के अभाव में किसान खेत तैयार कर मानसून का इंतजार कर रहे हैं, जबकि कृषि विशेषज्ञ जल्दबाजी में बोवनी नहीं करने की सलाह दे रहे हैं।
प्रदेश में सामान्य से करीब 37 प्रतिशत कम वर्षा-
मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की प्रगति धीमी पड़ने से जून माह के पहले 17 दिनों में सामान्य से काफी कम वर्षा दर्ज की गई है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में 1 जून से 17 जून के बीच औसतन 41.6 मिमी वर्षा होना चाहिए थी, लेकिन अब तक केवल लगभग 26 मिमी बारिश ही रिकॉर्ड की गई है। इस प्रकार प्रदेश में सामान्य से करीब 37 प्रतिशत कम वर्षा हुई है।
नीमच जिले में अपेक्षाकृत बेहतर रही प्री मानसून की बारिश-
हालांकि प्रदेश के अन्य जिलों की तुलना में नीमच जिले में इस वर्ष प्री-मानसून बारिश अपेक्षाकृत बेहतर रही है। पिछले वर्ष जहां इस अवधि में जिले में औसतन 1.9 इंच वर्षा रिकॉर्ड की गई थी, वहीं इस वर्ष अब तक 2.6 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है। इसके बावजूद कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बोवनी के लिए यह वर्षा पर्याप्त नहीं है। खेतों में स्थायी नमी बनने के लिए कम से कम 4 इंच बारिश आवश्यक मानी जाती है। यही कारण है कि जिले के अधिकांश किसान अभी भी बुवाई शुरू नहीं कर पाए हैं।
37 प्रतिशत कम बारिश ने बढ़ाई चिंता-
मौसम विभाग के अनुसार 1 जून से 17 जून के बीच प्रदेश में औसतन 41.6 मिमी बारिश होना चाहिए थी, लेकिन अब तक केवल लगभग 26 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। इस प्रकार प्रदेश में सामान्य से करीब 37 प्रतिशत कम बारिश हुई है। सबसे खराब स्थिति अलीराजपुर जिले की है, जहां अब तक एक भी बारिश रिकॉर्ड नहीं हुई है। इसके अलावा बालाघाट, दमोह, कटनी, मैहर, रीवा, शहडोल, टीकमगढ़, बड़वानी, भिंड, दतिया, धार और खरगोन सहित कई जिलों में आधा इंच से भी कम वर्षा दर्ज की गई है।
बुवाई के लिए इंतजार कर रहे किसान-
मानसून में देरी का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ रहा है। प्रदेश के लाखों किसान खरीफ फसलों की बुवाई के लिए पर्याप्त बारिश का इंतजार कर रहे हैं। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार जल्दबाजी में बुवाई करना किसानों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। यदि पर्याप्त नमी के बिना बीज बो दिए गए और बाद में बारिश नहीं हुई तो अंकुरण प्रभावित होगा तथा किसानों को दोबारा बुवाई करनी पड़ सकती है, जिससे लागत बढ़ जाएगी।
22 से 24 जून के बीच मानसून प्रवेश की संभावना-
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून की गति फिलहाल धीमी बनी हुई है। सामान्यतः मानसून 15 जून तक मध्य प्रदेश पहुंच जाता है, लेकिन इस बार इसके 22 से 24 जून के बीच प्रदेश में प्रवेश करने की संभावना जताई गई है। मानसून फिलहाल महाराष्ट्र और पश्चिमी तटीय क्षेत्रों में सक्रिय है तथा आगे बढ़ने की प्रक्रिया जारी है।
कृषि विशेषज्ञों की सलाह-
विशेषज्ञों का कहना है कि किसान जल्दबाजी में बुवाई न करें और पर्याप्त वर्षा का इंतजार करें। खेतों में कम से कम 100 मिमी यानी लगभग 4 इंच वर्षा होने पर ही बुवाई करना सुरक्षित माना जाता है। मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए किसानों को कृषि विभाग के परामर्श और मौसम पूर्वानुमान पर लगातार नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है। मानसून की सुस्त चाल ने फिलहाल प्रदेश के किसानों की चिंता बढ़ा दी है।