भोपाल। राजधानी भोपाल के नीलम पार्क में रविवार को शिक्षा व्यवस्था से जुड़े दो अलग-अलग आंदोलनों ने जोर पकड़ा। एक ओर माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षक भर्ती-2025 में पदवृद्धि की मांग को लेकर प्रदेशभर से आए अभ्यर्थी 21 अगस्त से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। वहीं दूसरी ओर स्कूल बचाओ संघर्ष समिति ने सरकारी स्कूलों को बंद करने के विरोध में राज्य स्तरीय कन्वेंशन आयोजित किया। इसमें विभिन्न जिलों से छात्र-छात्राएं, शिक्षक और अभिभावक शामिल हुए।
शिक्षक भर्ती में पदवृद्धि की मांग को लेकर ब्यावरा निवासी नरेंद्र राजपूत आमरण अनशन पर बैठे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने 21 अगस्त रात 12 बजे से खाना और पानी दोनों छोड़ दिया है। रविवार तक करीब 42 घंटे का अनशन पूरा हो चुका था। नरेंद्र ने कहा कि वे अकेले अपने लिए नहीं, बल्कि उन सभी अभ्यर्थियों के लिए आंदोलन कर रहे हैं, जो वर्षों से शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने मांग पूरी होने तक अनशन जारी रखने की बात कही।
धरना स्थल पर मौजूद तहसीलदार प्रीति चौरसिया ने बताया कि अभ्यर्थी अनशन पर बैठे हैं और उनकी मांगों को शासन स्तर तक भेजा जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि फिलहाल अनशन कर रहे अभ्यर्थी की स्थिति ठीक है।
बच्चों के साथ आंदोलन में पहुंचीं महिला अभ्यर्थी
पदवृद्धि की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन में महिला अभ्यर्थियों की परेशानी भी सामने आई। इंदौर की दीप्ति सिंह ठाकुर अपनी 5 और 8 साल की दो बेटियों के साथ नीलम पार्क पहुंची हैं। उन्होंने बताया कि पदवृद्धि की मांग को लेकर यह उनका 13वां आंदोलन है। पार्क में बच्चों के साथ रात गुजारने के दौरान मच्छर, पानी और वॉशरूम जैसी परेशानियां हो रही हैं, लेकिन मांग पूरी होने तक आंदोलन छोड़ने को तैयार नहीं हैं।
इसी तरह सरोज कुशवाहा भी अपने छोटे बेटे माधव को लेकर धरना स्थल पर पहुंची हैं। उनका कहना है कि वर्षों की पढ़ाई और अच्छे अंक हासिल करने के बावजूद चयन नहीं हुआ है। ऐसे में पदवृद्धि की मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखेंगी।
वर्ग-2 और वर्ग-3 में पद बढ़ाने की मांग
शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी वर्ग-2 में प्रत्येक विषय के 3 हजार पद बढ़ाने और वर्ग-3 में कुल 25 हजार पद किए जाने की मांग कर रहे हैं। इसके साथ बढ़े हुए पदों पर दूसरी काउंसलिंग कराने की मांग भी उठाई गई है।
अभ्यर्थियों का दावा है कि विभागों में पद रिक्त होने के बावजूद भर्ती में पर्याप्त पद जारी नहीं किए गए। उनका कहना है कि पात्रता और चयन परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करने वाले कई अभ्यर्थी अभी भी नियुक्ति से वंचित हैं।
वहीं स्कूल बचाओ संघर्ष समिति के कन्वेंशन में सरकारी स्कूलों को बंद करने के बजाय उनमें पर्याप्त शिक्षक, बेहतर सुविधाएं और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की मांग उठाई गई। एक ही स्थान पर चल रहे दोनों आंदोलनों में सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की आवाज बुलंद हुई।