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August 23, 2026, 4:52 pm
KHABAR : विकास के नाम पर विस्थापितों की अनदेखी, बंधा कोल ब्लॉक में बवाल, मुआवजे से पहले जंगल कटाई-फसल में दवा छिड़काव का आरोप, पढे़ खबर

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सिंगरौली। सिंगरौली के बंधा कोल ब्लॉक से एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। विस्थापितों और प्रभावित ग्रामीणों ने कंपनी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आरोप है कि मुआवजा और विस्थापन की सुविधाएं पूरी तरह दिए बिना ही जंगल की कटाई और निर्माण कार्य कराया जा रहा है। इतना ही नहीं, ग्रामीणों की फसलों में कथित तौर पर प्रतिबंधित कीटनाशक दवाओं के छिड़काव का भी आरोप है।


ग्रामीणों का आरोप है कि एक्सल माइनिंग की ओर से बंधा कोल ब्लॉक क्षेत्र में मनमाने तरीके से रास्ते बनाए जा रहे हैं और प्रभावित परिवारों के अधिकारों की अनदेखी की जा रही है। आरोप है कि धान की फसलों में कथित रूप से दवा का छिड़काव कराया जा रहा था। इसी मामले को लेकर एक ग्रामीण और कंपनी से जुड़े अधिकारियों-कर्मचारियों एवं सुरक्षाकर्मियों के बीच विवाद होने की बात सामने आई है। इसके बाद संबंधित ग्रामीण के फांसी लगाकर आत्महत्या किए जाने की खबर ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। हालांकि, आत्महत्या और कंपनी के साथ हुए विवाद के बीच सीधा संबंध है या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि और जांच बेहद जरूरी है।


सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रभावित ग्रामीणों को उनका पूरा मुआवजा और पुनर्वास अधिकार मिला। अगर नहीं, तो बिना मुआवजे के जंगल कटाई और निर्माण कार्य किसकी अनुमति से हुआ। फसलों में दवा के कथित छिड़काव की जिम्मेदारी किसकी है। ग्रामीण की मौत से पहले कंपनी कर्मचारियों के साथ हुए विवाद की निष्पक्ष जांच कब होगी। ग्रामीण अब कंपनी के साथ-साथ जिला प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठा रहे हैं।


सवाल यह भी है कि क्या प्रशासन को इन शिकायतों की जानकारी थी और यदि थी, तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई? मृतक के शव का पोस्टमार्टम बैढ़न में कराया जाना बताया जा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच से ही मौत की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेगी। अब निगाहें पुलिस जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जिला प्रशासन की कार्रवाई पर हैं। क्या बंधा कोल ब्लॉक के प्रभावितों को न्याय मिलेगा? क्या जिम्मेदारी तय होगी? या फिर विस्थापितों की आवाज एक बार फिर विकास के शोर में दब जाएगी।

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