चित्तौड़गढ़। गांधीनगर स्थित नानू नवकार भवन में चातुर्मासिक प्रवचन श्रृंखला के तहत धर्मसभा का आयोजन हुआ। धर्मसभा को संबोधित करते हुए अभिनव मुनि ने अहिंसा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संसार का प्रत्येक जीव जीना और सुख पाना चाहता है। कोई भी जीव दुख नहीं चाहता। इसलिए दूसरे जीवों को सुख और साता देना ही वास्तविक अहिंसा है।
अभिनव मुनि ने कहा कि जानबूझकर किए गए पापों का प्रायश्चित लेना आवश्यक होता है, जबकि अनजाने में हुए पापों से मुक्त होने के लिए प्रतिक्रमण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मनुष्य बने बिना प्रभु नहीं बना जा सकता। इसलिए सबसे पहले हमें सच्चे अर्थों में मानव बनना चाहिए, तभी भगवान बनने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
इससे पूर्व धर्मसभा को संबोधित करते हुए दिव्यम मुनि ने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन का निर्माण इस प्रकार करना चाहिए कि अंततः निर्वाण की प्राप्ति हो सके। उन्होंने कहा कि निमित्त हमेशा निर्दाेष होता है।
महासती श्री मयंक मणि ने कहा कि मंगल पाठ का श्रवण करते समय हमारे भाव ऐसे होने चाहिए कि पाप कर्म करते समय भी धर्म का स्मरण बना रहे। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपने कर्मों को धर्ममय बनाने का आह्वान किया।
धर्मसभा के दौरान सोनी परिवार की ओर से अठाई तप करने वाले तपस्वियों का बहुमान कर उनकी तपस्या की अनुमोदना की गई। धर्मसभा का संचालन पारस मल सोनी ने किया। अंत में मुनिश्री ने श्रद्धालुओं को व्रत प्रत्याख्यान करवाया तथा मंगल पाठ का श्रवण कराया।