खंडवा। खंडवा के ओंकारेश्वर स्थित मांधाता पर्वत पर एकात्म धाम में आज भव्य पंचायतन मंदिर के निर्माण का शुभारंभ हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पत्नी सहित कार्यक्रम में शिरकत की और संतों एवं जनप्रतिनिधियों के साथ विधि-विधान से हवन में आहुतियां दी और शिला पूजन किया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच 45 पवित्र शिलाओं का पूजन कर मंदिर निर्माण की आधारशिला रखी गई।
ओंकारेश्वर के मांधाता पर्वत पर विकसित हो रहे एकात्म धाम में पंचायतन मंदिर के शिलान्यास का भव्य आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पत्नी सहित कार्यक्रम में पहुंचे। यहां संत मंडल और आचार्यों की मौजूदगी में वैदिक अनुष्ठान संपन्न हुआ। मुख्यमंत्री और संतों ने 45 पवित्र शिलाओं का पूजन कर मंदिर निर्माण का शुभारंभ किया। प्राचीन पंचायतन शैली पर आधारित इस मंदिर के केंद्र में भगवान शिव का मुख्य देवालय होगा, जबकि चारों दिशाओं में भगवान विष्णु, सूर्य, गणेश और भगवती शक्ति के उप-देवालय बनाए जाएंगे। मंदिर पारंपरिक नागर शैली में तैयार किया जा रहा है। मंदिर में 100 नक्काशीदार स्तंभ, 8 लघु संवर्णा, भव्य तोरण-द्वार और 26 फीट व्यास का विशाल कलात्मक गुंबद आकर्षण का केंद्र होगा। पूरा मंदिर 16 फीट ऊंचे अधिष्ठान पर निर्मित होगा और इसमें करीब 80 हजार घन फीट नक्काशीदार गुलाबी बलुआ पत्थर का इस्तेमाल किया जा रहा है। मंदिर 121 कलशों से सुशोभित होगा।
सीएम ने कहा कि सिहंस्थ से पहले एकात्म यात्रा पूरे देश में अलख जगाते हुए निकलेगी, जिसका समापन उज्जैन सिंहस्थ में होगा। एकात्म धाम में पंचायतन मंदिर के जरिए आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित विभिन्न उपासना परंपराओं की एकात्मता के दर्शन को साकार किया जा रहा है। एकात्म धाम की परियोजना के तहत पहले चरण में 108 फीट ऊंची एकात्मता की प्रतिमा स्थापित की जा चुकी है, जबकि दूसरे चरण में 2195 करोड़ रुपये की लागत से अद्वैत लोक संग्रहालय का निर्माण प्रगति पर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ओंकारेश्वर आदि शंकराचार्य की ज्ञान भूमि है और एकात्म धाम भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और अद्वैत दर्शन को दुनिया तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।
ओंकारेश्वर में पंचायतन मंदिर का यह शिलान्यास समारोह केवल मंदिर निर्माण की शुरुआत नहीं, बल्कि आदि शंकराचार्य के एकात्मता और समरसता के संदेश को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब एकात्म धाम में आकार ले रहा यह भव्य मंदिर आने वाले समय में श्रद्धा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और स्थापत्य कला का भी प्रमुख केंद्र बनेगा।