धार। शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में पिछले 14 दिनों से बारिश नहीं हुई है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। खेतों में नमी कम होने लगी है और किसान अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। बारिश के अभाव में जलस्रोतों पर भी असर दिख रहा है। कई तालाबों में पानी की आवक नहीं हुई है, जिससे वे खाली पड़े हैं।
छोटे जलस्रोत और तलाई भी सूखने की कगार पर हैं। इसके साथ ही, तेज धूप और उमस भरी गर्मी ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है।
किसानों के अनुसार, फिलहाल सोयाबीन की फसल की स्थिति ठीक है, लेकिन यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो फसल प्रभावित हो सकती है। सोयाबीन के लिए पर्याप्त नमी आवश्यक है, और बारिश का लंबा अंतराल उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
किसानों की चिंता केवल सोयाबीन तक सीमित नहीं है। आने वाले रबी सीजन में गेहूं और चने की बुवाई के लिए पर्याप्त पानी की उपलब्धता जरूरी होगी। यदि बारिश का दौर नहीं आया, तो इन फसलों की सिंचाई और जल आपूर्ति में समस्या आ सकती है।
ग्रामीणों का कहना है कि बारिश की कमी का असर कृषि के साथ-साथ पेयजल व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। यदि तालाब और अन्य जलस्रोत नहीं भरते हैं, तो आगामी महीनों में पीने के पानी का संकट गहरा सकता है। ऐसे में किसान और ग्रामीण अब अच्छी बारिश की उम्मीद कर रहे हैं।