उज्जैन। करीब 2600 करोड़ रुपए की लागत से बन रहे उज्जैन-गरौठ नेशनल हाईवे में सात महीने के भीतर दूसरी बार धंसने की घटना सामने आई है। 6 फरवरी को 200 मीटर हिस्सा धंसने के बाद अब देवास रोड स्थित रेलवे ब्रिज के पास करीब 500 मीटर हिस्सा तकनीकी खामी के कारण बैठ गया है। एनएचएआई ने पूरे हिस्से को तोड़कर दोबारा बनाने का फैसला किया है, जिससे हाईवे शुरू होने में और देरी की आशंका है।
निर्माण एजेंसी जीवीआर ने सोमवार से खुदाई शुरू कर दी है। इससे हाईवे के हैंडओवर और ट्रैफिक शुरू होने में और देरी हो सकती है। देवास रोड और रेलवे पटरी के बीच बने ब्रिज के पास दो दिन पहले मटेरियल गिरने का वीडियो वायरल हुआ था। इसके बाद हाईवे की गुणवत्ता पर सवाल उठे और तकनीकी जांच कराई गई। जांच में खामी मिलने के बाद संबंधित हिस्से का पुनर्निर्माण शुरू कर दिया गया है।
500 मीटर हिस्सा नए सिरे से बनाया जा रहा
जीवीआर के सीनियर इंजीनियर अमित राय के मुताबिक प्प्ज् दिल्ली की जांच में 100 से 200 मीटर हिस्से में तकनीकी समस्या सामने आई थी। भविष्य में दोबारा धंसने का जोखिम न रहे, इसलिए करीब 500 मीटर का पूरा हिस्सा खोलकर जमीन से नए सिरे से बनाया जा रहा है। करीब एक साल पहले पूरी होनी थी यह परियोजना अब भी अधूरी है। हाईवे के दो पैकेज पूरे हो चुके हैं, लेकिन चंदेसरी से खेड़ा खजूरिया के बीच 41 किलोमीटर हिस्सा अभी बाकी है। करीब 900 करोड़ रुपए की लागत वाला यह पैकेज जीवीआर कंस्ट्रक्शन कंपनी बना रही है। रेलवे ओवरब्रिज और सड़क का काम दिसंबर तक पूरा करने की तैयारी थी, लेकिन अब धंसे हिस्से के पुनर्निर्माण से प्रोजेक्ट में और देरी की आशंका है। आगामी सिंहस्थ को देखते हुए इस मार्ग को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एनएचएआई उज्जैन के प्रोजेक्ट डायरेक्टर शिवम शर्मा ने कहा कि तकनीकी जांच के बाद धंसे हिस्से को दोबारा बनवाया जा रहा है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने। विभाग की कोशिश है कि 31 मार्च तक हाईवे पर ट्रैफिक शुरू करा दिया जाए।