नीमच। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के जल संरक्षण एवं जल संवर्धन के संकल्प को साकार करने की दिशा में नीमच जिले में जल संरचनाओं के निर्माण एवं संरक्षण का कार्य लगातार किया जा रहा है। इसी का सकारात्मक परिणाम ग्राम अमावली जागीर में देखने को मिला है, जहां जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत करीब 19 लाख रुपये की लागत से निर्मित अमृत सरोवर पहली ही बारिश में लबालब भर गया।
गांव के समीप निर्मित इस अमृत सरोवर की जल संग्रहण क्षमता 15 हजार घन मीटर से अधिक है। बारिश के पानी को सहेजकर भरे सरोवर से ग्रामीणों में खुशी है। यह जल संरचना ग्रामीणों के लिए जल सुरक्षा के साथ पशुपालन और आजीविका के नए अवसरों की उम्मीद भी बनी है।
भूजल स्तर बढ़ाने में मिलेगी मदद-
अमृत सरोवर में संग्रहित वर्षा जल के परकोलेशन से आसपास के भूजल स्तर को बढ़ाने में मदद मिलेगी। इससे क्षेत्र में सतही और भूजल की उपलब्धता मजबूत होने के साथ स्थानीय जैव विविधता को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
सरोवर से ग्रामीणों और पशुपालकों को भी लाभ मिलेगा। इसके आसपास विकसित होने वाले प्राकृतिक चारागाह से पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। इससे पशुपालन को प्रोत्साहन मिलने के साथ ग्रामीण परिवारों की आय के अतिरिक्त साधन विकसित हो सकेंगे।
जिले में 18 अमृत सरोवरों का निर्माण पूर्ण-
कलेक्टर हिमांशु चंद्रा के निर्देशन एवं जिला पंचायत सीईओ अमन वैष्णव के मार्गदर्शन में ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जिले में जल संरक्षण एवं संवर्धन को प्राथमिकता देते हुए इस वर्ष 18 अमृत सरोवरों का निर्माण पूर्ण किया गया है। प्रत्येक सरोवर की जल संग्रहण क्षमता 15 हजार घन मीटर से अधिक है।
नीमच जिला केंद्रीय भूजल संवर्धन बोर्ड की गाइडलाइन के अनुसार अति-दोहित श्रेणी में आता है। ऐसे में वर्षा जल को संरक्षित कर भूजल स्तर बढ़ाने में अमृत सरोवर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। ये जल संरचनाएं वर्तमान जरूरतों को पूरा करने के साथ भविष्य के लिए स्थायी जल स्रोत विकसित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम हैं।
जल से आजीविका तक बढ़ेंगे अवसर-
आगामी समय में अमृत सरोवरों पर उपयोगकर्ता समूह गठित किए जाएंगे। पर्याप्त जल उपलब्ध होने पर मछली पालन, मखाना उत्पादन एवं सिंचाई जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य किया जाएगा। इससे ग्रामीणों को अतिरिक्त आय और रोजगार के अवसर मिलने की संभावना है।
अमावली जागीर का अमृत सरोवर यह संदेश दे रहा है कि बारिश की हर बूंद को सहेजने से केवल जल संरक्षण ही नहीं, बल्कि खेती, पशुपालन, आजीविका और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है। जल संरक्षण की यह पहल क्षेत्र में स्थायी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।