बालाघाट जिले के आदिवासी इलाके में बीमारी से प्रभावित बच्चों का हाल जानने मंगलवार रात कलेक्टर कुमार सत्यम जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने बच्चा वार्ड में भर्ती बच्चों और उनके परिजनों से मुलाकात कर स्वास्थ्य की जानकारी ली। इस दौरान सीएमएचओ डॉ. परेश उपलप और सिविल सर्जन डॉ. निलय जैन भी मौजूद रहे।
बेड कम पड़े तो कोविड आईसीयू में भर्ती किए बच्चे
चाइल्ड वार्ड में बेड की कमी के कारण कोविड के समय तैयार किए गए आईसीयू वार्ड में भी बीमार बच्चों को भर्ती किया गया है। कलेक्टर ने स्वास्थ्य अधिकारियों से बच्चों के इलाज और उनकी वर्तमान स्थिति की जानकारी ली।
दरअसल, आदिवासी गांवों में बच्चों के बीमार होने का सिलसिला लगातार जारी है। रोजाना बड़ी संख्या में बच्चों को जिला अस्पताल लाया जा रहा है। बच्चा वार्ड में बेड कम होने के कारण एक ही बिस्तर पर दो से तीन बच्चों का इलाज किए जाने की स्थिति सामने आई थी। दैनिक भास्कर ने मंगलवार को इस समस्या को प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद देर रात कलेक्टर अस्पताल पहुंचे।
सीएमएचओ के खिलाफ युवाओं ने की नारेबाजी
कलेक्टर के अस्पताल पहुंचने के दौरान आदिवासी युवाओं ने जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग को लेकर सीएमएचओ डॉ. परेश उपलप के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। युवाओं ने बच्चों की बिगड़ती हालत और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई।
कलेक्टर ने अस्पताल में बच्चों के परिजनों से भी बातचीत की और इलाज के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने भरोसा दिलाया कि बीमार बच्चों का लगातार उपचार किया जा रहा है और स्वास्थ्य विभाग की टीमें उनकी निगरानी कर रही हैं।
50 के बाद 59 बेड, 20 और बढ़ेंगे
कलेक्टर कुमार सत्यम ने बताया कि बच्चों के लगातार अस्पताल आने से बेड की कमी की स्थिति को देखते हुए क्षमता बढ़ाई जा रही है। जिला अस्पताल में 50 बेड का चाइल्ड वार्ड है, जिसमें 39 बेड और बढ़ाए गए हैं। इसके अलावा 20 बेड और आने वाले हैं। इसके बाद बीमार बच्चों के लिए बेड की कमी नहीं होगी।
डिस्चार्ज के बाद दोबारा बीमार होने पर सवाल
हालांकि, बच्चों के लगातार डिस्चार्ज होने और कुछ समय बाद फिर बीमार होकर अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति भी सामने आ रही है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि बच्चे इलाज के बाद पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौट रहे हैं या नहीं। लगातार दोबारा भर्ती होने के कारणों को लेकर भी स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था और बच्चों के उपचार की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।