नीमच। कोरोना महामारी का कठिन दौर इसरार पठान के परिवार के लिए बेहद पीड़ादायक रहा। संक्रमण के दौरान वर्ष 2021 में उन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया। माता-पिता के निधन के बाद उनके सामने पढ़ाई जारी रखने और भविष्य को संवारने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई। ऐसे कठिन समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना उनके लिए सहारा बनी।
नीमच जिले की तहसील सिंगोली के ग्राम अलोरी गड़वाड़ा निवासी इसरार पठान वर्ष 2020 में कक्षा 10वीं में अध्ययनरत थे। कोरोना महामारी के दौरान वर्ष 2021 में उनके माता-पिता का निधन हो गया। इसके बाद उन्हें पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना का लाभ मिला। योजना के तहत 18 वर्ष की आयु पूरी होने पर उन्हें 10 लाख रुपये की सहायता राशि उपलब्ध कराई गई, जो 23 वर्ष की आयु पूर्ण होने के बाद उनके खाते में हस्तांतरित कर दी गई।
इस राशि से इसरार को आर्थिक जरूरतें पूरी करने के साथ आगे की पढ़ाई जारी रखने और भविष्य के लिए आर्थिक सुरक्षा का आधार मिला। योजना के तहत जमा राशि पर उन्हें हर माह 5 हजार रुपये से अधिक का ब्याज भी प्राप्त होता रहा।
मुश्किल दौर में मिला सहारा-
इसरार बताते हैं कि माता-पिता को खोने के बाद जीवन बेहद कठिन हो गया था। ऐसे समय में पीएम केयर्स योजना से मिली आर्थिक सहायता उनके लिए बड़ा संबल बनी। इससे उन्हें भविष्य को लेकर भरोसा मिला और अपने सपनों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिला।
इसरार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्र सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कठिन समय में सरकार ने उनके भविष्य की चिंता करते हुए जो सहायता उपलब्ध कराई, उससे उन्हें आत्मनिर्भर होकर आगे बढ़ने का विश्वास मिला।
माता-पिता के निधन के बाद उपजे कठिन दौर में पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना इसरार के लिए उम्मीद और आर्थिक सुरक्षा का आधार बनी। योजना से मिले इस संबल ने उन्हें परिस्थितियों से उबरकर आत्मविश्वास के साथ बेहतर भविष्य की ओर बढ़ने की राह दिखाई।