नीमच। कलेक्टर हिमांशु चंद्रा के निर्देशानुसार बुधवार को उप संचालक कृषि नगीन सिंह रावत, सहायक संचालक ओ.एस. बर्मन सहित कृषि अधिकारियों ने जावद विकासखंड के विभिन्न ग्रामों का भ्रमण कर खरीफ फसलों की स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने ग्राम अठाना, हनुमंतिया, खोर, धनेरिया, तुंबा, महेशपुरिया, सुवाखेड़ा, बरखेड़ा कामलिया सहित अन्य गांवों में खेतों का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने किसानों से फसलों की स्थिति की जानकारी ली तथा फसलों की नियमित निगरानी करने, निंदाई-गुड़ाई के साथ कीट एवं व्याधियों की रोकथाम के लिए आवश्यक सावधानियां बरतने की सलाह दी।
सोयाबीन में सेमीलूपर व गर्डल बीटल का प्रकोप हो तो करें नियंत्रण-
कृषि अधिकारियों ने बताया कि सोयाबीन में सेमीलूपर एवं गर्डल बीटल का प्रकोप दिखाई देने पर क्लोरएंट्रानिलीप्रोल 18.5 प्रतिशत एससी 150 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर अथवा पूर्व मिश्रित बीटा सायफ्लुथ्रिन + इमिडाक्लोप्रिड 350 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर अथवा थायोमिथाक्सम + लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन 125 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव किया जा सकता है।
पीला मोजेक रोग से बचाव की सलाह-
सोयाबीन एवं उड़द में पीला मोजेक रोग की रोकथाम के लिए रसचूसक कीट एवं सफेद मक्खी के नियंत्रण पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई है। इसके लिए डाईमिथोएट 30 प्रतिशत ईसी 750 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर अथवा इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल 200 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करने की सलाह दी गई।
मक्का में फॉल आर्मीवर्म पर रखें नजर-
मक्का में फॉल आर्मीवर्म का प्रकोप होने पर इमामेक्टिन बेंजोएट 220 ग्राम प्रति हेक्टेयर अथवा क्लोरएंट्रानिलीप्रोल + लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन 200 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करने की सलाह दी गई है।
मूंगफली में सफेद लट और व्याधि नियंत्रण-
मूंगफली में सफेद लट के नियंत्रण के लिए क्लोथियानीडीन 50 प्रतिशत डब्ल्यूडीजी 250 ग्राम प्रति 1000 लीटर पानी प्रति हेक्टेयर की दर से ड्रेंचिंग करने की सलाह दी गई। वहीं व्याधि नियंत्रण के लिए पूर्व मिश्रित टेबुकोनाजोल + सल्फर 1 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करने को कहा गया।
खेतों में जलभराव होने पर तत्काल करें जल निकासी-
अधिकारियों ने किसानों को सलाह दी कि वर्षा के कारण खेतों में पानी भरने की स्थिति में फसल को नुकसान से बचाने के लिए तत्काल जल निकासी की व्यवस्था करें।
फलदार पौधों में कीट नियंत्रण की सलाह-
फलदार पौधों में कीट नियंत्रण के लिए डाईमिथोएट 1.5 मिलीलीटर एवं कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50 डब्ल्यूपी 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से स्प्रे करने की सलाह दी गई।
सोयाबीन में जैविक नियंत्रण को दें बढ़ावा-
सोयाबीन की फसल में कीट नियंत्रण के लिए जैविक उपायों को बढ़ावा देने की सलाह देते हुए अधिकारियों ने किसानों से खेतों में 30 से 40 टी-आकार के बर्ड परचर लगाने को कहा। इससे पक्षियों के माध्यम से कीटों के जैविक नियंत्रण में मदद मिलेगी।
लक्षण दिखाई दें तो विशेषज्ञों से लें सलाह-
कृषि अधिकारियों ने किसानों से अपील की कि फसलों में कीट-व्याधि के लक्षण दिखाई देने पर बिना विलंब कृषि विशेषज्ञों से सलाह लें और विशेषज्ञों की अनुशंसा के अनुसार ही नियंत्रण उपाय अपनाएं।
आवश्यक कृषि सलाह के लिए कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. सी.पी. पचैरी से मोबाइल नंबर 9329468805 तथा कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस.एस. सारंगदेवोत से मोबाइल नंबर 9424530725 पर संपर्क किया जा सकता है।