नीमच। अफीम नीति 2026-27 के ऐलान से पहले अफीम उत्पादक किसानों की धड़कनें तेज हैं, वहीं केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) ने किसानों को दलालों और अफवाहों से सावधान रहने का अलर्ट जारी किया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि भारत सरकार द्वारा नीति अधिसूचित होने से पहले लाइसेंस की पात्रता की जानकारी किसी व्यक्ति या स्थानीय अधिकारी के पास नहीं होती। ऐसे में लाइसेंस दिलाने के नाम पर पैसे मांगने वालों से सावधान रहे। इधर, नीमच-मंदसौर से लेकर राजस्थान के चित्तौड़गढ़-प्रतापगढ़ तक अफीम काश्तकार आगामी नीति में बदलाव की उम्मीद लगाए बैठे हैं और सीपीएस पद्धति बंद करने से लेकर चिराई-लुआई व्यवस्था बहाल करने, समान पट्टे और अफीम का भाव बढ़ाने सहित कई मांगें सरकार के सामने रख रहे हैं।
नीति अधिसूचित होने से पहले कोई जानकारी नहीं-
इधर केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो की ओर से अफीम काश्त उत्पादक किसानों के लिए महत्वपूर्ण सूचना जारी की गई है। किसानों को बताया गया है कि भारत सरकार द्वारा प्रत्येक वर्ष अफीम काश्त के लाइसेंस के लिए पात्रता की सामान्य शर्तें अफीम नीति के रूप में अधिसूचित की जाती हैं। फसल वर्ष 2026-27 के लिए भी लाइसेंस की पात्रता संबंधी सामान्य शर्तें भारत सरकार द्वारा अधिसूचित की जानी हैं।
विभागीय वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी जानकारी-
अधिसूचना जारी होने के बाद लाइसेंस प्राप्त करने संबंधी सामान्य शर्तें केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो की विभागीय वेबसाइट पर अपलोड की जाएंगी। इसका प्रकाशन स्थानीय समाचार पत्रों के माध्यम से भी कराया जाएगा। अफीम नीति के प्रावधानों के तहत संभावित पात्र एवं अपात्र किसानों की सूची भी विभागीय वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी। नीति में निर्धारित प्रावधानों के आधार पर पात्र किसानों को संबंधित जिला अफीम अधिकारी कार्यालय द्वारा फसल वर्ष 2026-27 के लिए अफीम काश्त के लाइसेंस जारी किए जाएंगे।
दलालों से सावधान रहने की अपील-
केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो ने किसानों को स्पष्ट किया है कि अफीम नीति भारत सरकार द्वारा उच्च स्तर पर निर्धारित की जाती है। अधिसूचना जारी होने से पहले किसी व्यक्ति, स्थानीय कर्मचारी अथवा अधिकारी को इसकी जानकारी नहीं होती। ऐसे में किसानों से अपील की गई है कि वे अफीम काश्त के लाइसेंस की पात्रता के संबंध में किसी दलाल अथवा अन्य व्यक्ति के बहकावे में न आएं।
किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान नहीं दें-
विभाग ने कहा है कि यदि कोई व्यक्ति अफीम काश्त का लाइसेंस दिलाने के नाम पर किसी प्रकार की धनराशि की मांग करता है तो किसान उसके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों सहित विभागीय उच्चाधिकारियों, भ्रष्टाचार निरोधक संस्था अथवा केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो, भोपाल को शिकायत कर सकते हैं। किसानों से किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान नहीं देने की अपील की गई है।
अफीम किसानों की प्रमुख मांगें-
आगामी अफीम नीति को लेकर किसानों ने सीपीएस पद्धति बंद कर चिराई-लुआई व्यवस्था बहाल करने, मार्फिन मानक 3.5 प्रतिशत करने और सभी पात्र किसानों को 10-10 आरी के समान पट्टे देने की मांग की है। इसके अलावा अफीम का सरकारी खरीद भाव 10 हजार प्रति किलो, पति-पत्नी दोनों को बुआई का अधिकार तथा एनडीपीएस की धारा 8/29 में राहत और डोडा पोस्त के ठेके शुरू करने की मांग भी उठाई गई है।
नीति के ऐलान का इंतजार-
अफीम उत्पादक किसानों के लिए आगामी अफीम नीति बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। एक ओर किसान पट्टे, मार्फिन, खरीद भाव और खेती की पद्धति में बदलाव की उम्मीद लगाए हुए हैं, वहीं दूसरी ओर केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो ने स्पष्ट किया है कि लाइसेंस की पात्रता संबंधी जानकारी केवल भारत सरकार द्वारा नीति अधिसूचित किए जाने के बाद ही आधिकारिक रूप से सामने आएगी। ऐसे में किसानों से अपील की गई है कि वे केवल विभागीय सूचना पर भरोसा करें और लाइसेंस दिलाने के नाम पर पैसे मांगने वाले बिचौलियों से सावधान रहें।