उज्जैन। रामघाट पर मां शिप्रा की पारंपरिक संध्याकालीन आरती को लेकर विवाद एक बार फिर सामने आया है। गुरुवार को कंट्रोल रूम के पास स्थित एक निजी कैफे में श्री क्षेत्र पण्डा समिति एवं समस्त तीर्थ पुरोहित-पंडा समाज की ओर से प्रेस वार्ता आयोजित की गई।
इसमें समिति पदाधिकारियों ने रामघाट पर वर्षों से चली आ रही आरती व्यवस्था में बदलाव और श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के माध्यम से आरती शुरू कराने के प्रयास का विरोध किया। समिति ने आरोप लगाया कि पारंपरिक धार्मिक व्यवस्था को इवेंट और टेंडर के माध्यम से संचालित करने का प्रयास किया जा रहा है।
समिति अध्यक्ष पंडित राजेश त्रिवेदी ने कहा कि राणोजी की छतरी के पास रामघाट पर पण्डा-पुरोहित समाज द्वारा लंबे समय से मां शिप्रा की आरती की जा रही है। उनका आरोप है कि अब महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के माध्यम से इसी क्षेत्र में अलग तरीके से आरती शुरू कराने का प्रयास किया जा रहा है। समिति का दावा है कि महाकाल मंदिर प्रबंध समिति का कार्यक्षेत्र मंदिर परिसर तक है और घाट क्षेत्र में हस्तक्षेप उसके अधिकार क्षेत्र का विषय है।
आरती के टेंडर पर भी उठाए सवाल
पण्डा समिति ने स्मार्ट सिटी द्वारा आरती के आयोजन को लेकर जारी टेंडर पर भी सवाल उठाए। समिति का कहना है कि धार्मिक आरती को किसी इवेंट की तरह टेंडर के माध्यम से संचालित करना परंपरा और धार्मिक भावनाओं के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने आरती के व्यावसायीकरण का विरोध करते हुए कहा कि पीढ़ियों से चली आ रही धार्मिक व्यवस्था को उसी परंपरा के अनुसार जारी रखा जाना चाहिए।
प्रेस वार्ता में वक्ताओं ने महाकाल मंदिर प्रबंध समिति की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। आरोप लगाया गया कि मंदिर की व्यवस्थाओं, वीआईपी व्यवस्था और श्रद्धालुओं से जुड़े विवादों को पूरी तरह नियंत्रित करने के बजाय समिति अब अपने कार्यक्षेत्र से बाहर घाट क्षेत्र में हस्तक्षेप कर रही है।