नीमच। अफीम नीति 2026-27 को लेकर अब इंतजार अंतिम दौर में पहुंच गया है। सितंबर की शुरुआत हो चुकी है और 3 सितंबर तक नीति का आधिकारिक ऐलान नहीं होने के बाद अफीम उत्पादक किसानों की निगाहें अब केंद्र सरकार की अधिसूचना पर टिक गई हैं। केंद्र सरकार की ओर से सितंबर की शुरुआत में नीति जारी किए जाने की उम्मीद के बीच अब सितंबर के पहले पखवाड़े में कभी भी अफीम नीति जारी होने की संभावना जताई जा रही है। नीति के ऐलान को लेकर नीमच, मंदसौर और राजस्थान के चित्तौड़गढ़-प्रतापगढ़ क्षेत्र के अफीम उत्पादक किसानों में उत्सुकता बढ़ गई है। नई नीति में किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे अफीम काश्त के लाइसेंस, पट्टों की संख्या और क्षेत्रफल, मार्फिन की सीमा, सरकारी खरीद भाव तथा अफीम उत्पादन की पद्धति से जुड़े हैं। किसान लंबे समय से इन मुद्दों पर बदलाव की मांग करते आ रहे हैं।
पहले पखवाड़े पर टिकी किसानों की निगाह-
अफीम उत्पादक क्षेत्रों में सितंबर का पहला पखवाड़ा खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछले वर्ष अफीम नीति 12 सितंबर को जारी हुई थी। इस वजह से किसान इस बार भी सितंबर के शुरुआती दिनों से ही नीति के ऐलान का इंतजार कर रहे हैं। 3 सितंबर बीतने के साथ ही किसानों के बीच चर्चा तेज हो गई है कि नीति अब पहले पखवाड़े में किसी भी दिन जारी हो सकती है। नीति जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि फसल वर्ष 2026-27 में किन किसानों को अफीम काश्त के लाइसेंस मिलेंगे, पात्रता की शर्तें क्या रहेंगी और सरकार ने अफीम उत्पादन एवं खरीद से जुड़े नियमों में कोई बदलाव किया है या नहीं।
विभागीय वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी जानकारी-
अधिसूचना जारी होने के बाद लाइसेंस प्राप्त करने संबंधी सामान्य शर्तें केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो की विभागीय वेबसाइट पर अपलोड की जाएंगी। इसका प्रकाशन स्थानीय समाचार पत्रों के माध्यम से भी कराया जाएगा। अफीम नीति के प्रावधानों के तहत संभावित पात्र एवं अपात्र किसानों की सूची भी विभागीय वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी। नीति में निर्धारित प्रावधानों के आधार पर पात्र किसानों को संबंधित जिला अफीम अधिकारी कार्यालय द्वारा फसल वर्ष 2026-27 के लिए अफीम काश्त के लाइसेंस जारी किए जाएंगे।
दलालों से सावधान रहने की अपील-
केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो ने किसानों को स्पष्ट किया है कि अफीम नीति भारत सरकार द्वारा उच्च स्तर पर निर्धारित की जाती है। अधिसूचना जारी होने से पहले किसी व्यक्ति, स्थानीय कर्मचारी अथवा अधिकारी को इसकी जानकारी नहीं होती। ऐसे में किसानों से अपील की गई है कि वे अफीम काश्त के लाइसेंस की पात्रता के संबंध में किसी दलाल अथवा अन्य व्यक्ति के बहकावे में न आएं।
किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान नहीं दें-
विभाग ने कहा है कि यदि कोई व्यक्ति अफीम काश्त का लाइसेंस दिलाने के नाम पर किसी प्रकार की धनराशि की मांग करता है तो किसान उसके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों सहित विभागीय उच्चाधिकारियों, भ्रष्टाचार निरोधक संस्था अथवा केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो, भोपाल को शिकायत कर सकते हैं। किसानों से किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान नहीं देने की अपील की गई है।
अफीम किसानों की प्रमुख मांगें-
आगामी अफीम नीति को लेकर किसानों ने सीपीएस पद्धति बंद कर चिराई-लुआई व्यवस्था बहाल करने, मार्फिन मानक 3.5 प्रतिशत करने और सभी पात्र किसानों को 10-10 आरी के समान पट्टे देने की मांग की है। इसके अलावा अफीम का सरकारी खरीद भाव 10 हजार प्रति किलो, पति-पत्नी दोनों को बुआई का अधिकार तथा एनडीपीएस की धारा 8/29 में राहत और डोडा पोस्त के ठेके शुरू करने, नामांतरण के सरलीकरण करने की मांग भी उठाई गई है।
नीति के ऐलान का इंतजार-
अफीम उत्पादक किसानों के लिए आगामी अफीम नीति बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। एक ओर किसान पट्टे, मार्फिन, खरीद भाव और खेती की पद्धति में बदलाव की उम्मीद लगाए हुए हैं, वहीं दूसरी ओर केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो ने स्पष्ट किया है कि लाइसेंस की पात्रता संबंधी जानकारी केवल भारत सरकार द्वारा नीति अधिसूचित किए जाने के बाद ही आधिकारिक रूप से सामने आएगी। ऐसे में किसानों से अपील की गई है कि वे केवल विभागीय सूचना पर भरोसा करें और लाइसेंस दिलाने के नाम पर पैसे मांगने वाले बिचौलियों से सावधान रहें। आपकों बता दें गत वर्ष अफीम नीति 12 सितंबर को जारी हुई थी। इस बार भी किसान सितंबर माह के पहले पखवाड़े में नीति जारी होने की आस लगाए बैठे हैं।