मनासा। जिले में यात्री बसों में क्षमता से अधिक सवारियां बैठाने, बसों के भीतर सामान ढोने और नियमों की अनदेखी किए जाने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर जिम्मेदार परिवहन विभाग की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है?
नीमच में सड़क सुरक्षा को लेकर प्रशासनिक बैठकों में सार्वजनिक वाहनों की फिटनेस जांच और ओवरलोडिंग करने वाले वाहनों पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद यदि सड़कों पर क्षमता से अधिक यात्रियों और सामान के साथ बसें संचालित हो रही हैं, तो यह व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
बसों में सवारी के साथ सामान—किसकी जिम्मेदारी?
यात्री बसों का इस्तेमाल यात्रियों के साथ बड़ी मात्रा में लगेज ढोने के लिए किए जाने की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं। वर्ष 2023 में भी नीमच में यात्री बसों में सामान ढोने को लेकर परिवहन विभाग ने कार्रवाई की चेतावनी दी थी।
वहीं फरवरी 2026 में ओवरलोड बस पर यातायात पुलिस द्वारा कार्रवाई किए जाने की रिपोर्ट भी सामने आई। इससे स्पष्ट है कि ओवरलोडिंग की समस्या को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
RTO की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
सबसे गंभीर सवाल यह है कि यदि नियमों का उल्लंघन खुले तौर पर हो रहा है तो नियमित जांच और कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई देती? क्या केवल अभियान चलाकर चालान करना पर्याप्त है, या बसों की फिटनेस, परमिट, क्षमता और सामान के परिवहन की नियमित निगरानी भी जरूरी है?
हाल ही में नीमच RTO में पंजीकृत दो बसों के जयपुर में निर्माणाधीन अवस्था में मिलने की रिपोर्ट सामने आई थी। मामले में पंजीयन प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की भूमिका जांच के दायरे में बताई गई।
मिलीभगत के आरोपों की हो निष्पक्ष जांच
बस संचालकों और अधिकारियों के बीच कथित मिलीभगत के आरोपों की भी चर्चा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है। इसलिए मांग उठ रही है कि परिवहन विभाग वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में जिले की यात्री बसों की अचानक जांच कराए।
जनता का सीधा सवाल है—जब नियम मौजूद हैं, जांच के अधिकार मौजूद हैं और कार्रवाई के निर्देश भी दिए जाते हैं, तो फिर नियम तोड़ने वाली बसें सड़कों पर कैसे दौड़ रही हैं?
प्रशासन को चाहिए कि नीमच जिले में संचालित सभी यात्री बसों की फिटनेस, परमिट, निर्धारित यात्री क्षमता और लगेज परिवहन की विशेष जांच कराई जाए तथा दोषी पाए जाने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए।
यात्रियों की सुरक्षा किसी भी विभागीय लापरवाही या कथित मिलीभगत से बड़ी है। अब देखना यह है कि प्रशासन इन सवालों का जवाब जांच और कार्रवाई के जरिए देता है या नहीं।