नीमच। नई अफीम नीति 2026-27 को लेकर किसानों की निगाहें अब केंद्र सरकार के फैसले पर टिकी हैं। इसी बीच वरिष्ठ पत्रकार मुस्तफा हुसैन ने दिल्ली में 12 अगस्त को हुई हाईपावर बैठक का हवाला देते हुए अफीम उत्पादक क्षेत्र के किसानों से जुड़े मुद्दों और जनप्रतिनिधियों की मांगों को सामने रखा है। उनके अनुसार सूत्रों से मिली जानकारी में बैठक में सीपीएस पद्धति की समीक्षा, सीपीएस वाले किसानों को लुआई-चिराई के पट्टे देने, डोडाचूरा की सरकारी खरीदी, एनडीपीएस एक्ट में बदलाव, अफीम के मूल्य में वृद्धि सहित कई महत्वपूर्ण मांगें उठाई गई हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या नई नीति में सीपीएस पद्धति की विदाई होगी और किसानों को पारंपरिक लुआई-चिराई व्यवस्था में वापस लाया जाएगा?
किसानों की नजर नई अफीम नीति 2026-27 पर
मुस्तफा हुसैन ने बताया कि 12 अगस्त को दिल्ली में हुई हाईपावर बैठक में अफीम उत्पादक अंचल के जनप्रतिनिधि वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी को किसानों की मांगों से संबंधित प्रतिवेदन सौंप चुके हैं। हाई पॉवर बैठक में अफीम उत्पादक अंचल के जनप्रतिनिधियों ने किसानों से जुड़े विभिन्न मुद्दे प्रमुखता से उठाए हैं। अब किसानों की नजर नई अफीम नीति 2026-27 पर है।
डोडाचूरा खरीदी से लेकर एनडीपीएस एक्ट में बदलाव की मांग-
वरिष्ठ पत्रकार मुस्तफा हुसैन ने बताया कि किसानों की प्रमुख मांगों में डोडाचूरा की सरकारी खरीदी, एनडीपीएस एक्ट में आवश्यक बदलाव, मृतक काश्तकारों के नामांतरण आवेदनों का शीघ्र निराकरण, अफीम के मूल्य में वृद्धि और लाइसेंस ऑनलाइन जारी करना शामिल है। इसके अलावा किसानों को फसल बीमा का लाभ देने तथा प्राकृतिक आपदा से फसल खराब होने की स्थिति में राहत की व्यवस्था करने की मांग भी उठाई जा रही है। किसानों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा की स्थिति में अफीम की फसल को नुकसान होने पर उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के कारण आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में नई नीति में किसानों के हित में राहतकारी प्रावधान किए जाने की उम्मीद है।
सीपीएस पद्धति पर उठ रहे सवाल-
वरिष्ठ पत्रकार मुस्तफा हुसैन ने बताया कि पिछले 5-6 वर्षों में सीपीएस पद्धति के अंतर्गत आने वाले किसानों से सरकार करीब 12 हजार मीट्रिक टन डोडा ले चुकी है। उनका कहना है कि डोडे की प्रोसेसिंग और उससे मार्फिन निकालने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। क्षेत्र में यह चर्चा है कि पर्याप्त प्रोसेसिंग व्यवस्था नहीं होने के कारण अब तक डोडे से अपेक्षित मात्रा में मार्फिन प्राप्त नहीं हो सकी है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि इतने वर्षों से जमा डोडे की अब प्रोसेसिंग की जाती है तो उससे कितनी मात्रा में मार्फिन प्राप्त होगी और इसका किसानों को कितना लाभ मिलेगा। इसी आधार पर सीपीएस पद्धति की समीक्षा की मांग भी जोर पकड़ रही है।
जनप्रतिनिधि लगातार उठा रहे किसानों की आवाज-
वरिष्ठ पत्रकार मुस्तफा हुसैन के अनुसार मालवा-मेवाड़ क्षेत्र के जनप्रतिनिधि समय-समय पर दिल्ली और विधानसभा में अफीम किसानों के मुद्दे उठाते रहे हैं। मंदसौर के पूर्व विधायक यशपाल सिंह सिसौदिया ने एनडीपीएस एक्ट में बदलाव की मांग उठाने के साथ सीपीएस पद्धति लागू करने से पहले इसके ट्रायल की आवश्यकता पर भी जोर दिया था। वहीं चित्तौड़गढ़ विधायक चंद्रभान सिंह आक्या भी राजस्थान विधानसभा में कई बार अफीम किसानों से जुड़े मुद्दे उठा चुके हैं। उन्होंने डोडाचूरा की सरकारी खरीदी और एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/29 से जुड़े प्रावधानों में बदलाव की मांग को लेकर किसानों की पैरवी की है। इनके अलावा प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी मंदसौर जिले के दलौदा में एनडीपीएस एक्ट में बदलाव की आवश्यकता की बात कह चुके हैं।
सीपीएस किसानों को लुआई-चिराई के पट्टों की मांग
मुस्तफा हुसैन ने बताया कि 12 अगस्त को दिल्ली में हुई हाईपावर बैठक में अफीम उत्पादक क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने पिछले पांच वर्षों के प्रदर्शन के आधार पर सीपीएस पद्धति वाले किसानों को लुआई-चिराई पद्धति के तहत पट्टे जारी करने की मांग रखी। किसानों का मानना है कि नई नीति में इस मांग पर निर्णय होने से बड़ी संख्या में काश्तकारों को राहत मिल सकती है।
सितंबर के मध्य में नीति जारी होने की उम्मीद
नई अफीम नीति 2026-27 को लेकर अब सितंबर माह के मध्य तक घोषणा होने का अनुमान जताया जा रहा है। हालांकि नीति जारी होने तक सीपीएस पद्धति को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होगी। यदि किसानों और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की मांगों पर वित्त मंत्रालय सकारात्मक निर्णय लेता है और सीपीएस व्यवस्था में बदलाव किया जाता है, तो यह अफीम उत्पादक किसानों के लिए बड़ा नीतिगत बदलाव माना जाएगा। फिलहाल किसानों की निगाहें नई नीति पर टिकी हैं। पट्टे, अफीम का मूल्य, डोडाचूरा खरीदी, एनडीपीएस एक्ट और सीपीएस पद्धतिकृइन सभी मुद्दों पर सरकार के फैसले का इंतजार है।