उज्जैन। सती गेट के पास स्थित प्रसिद्ध खड़े हनुमान मंदिर को हटाने की प्रशासन की कार्रवाई पिछले करीब 30 घंटे से जारी है। मंदिर के आसपास का ज्यादातर हिस्सा तोड़ दिया गया है, लेकिन हनुमानजी की प्रतिमा अभी भी अपनी जगह पर लगी हुई है।
प्रशासन प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से हटाने के लिए सावधानी बरत रहा है। शनिवार सुबह से ही नगर निगम, प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर मौजूद रही। मंदिर के आसपास बैरिकेडिंग कर दी गई है।
इसके बाद भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए वहां पहुंच रहे हैं। प्रशासन की योजना प्रतिमा को यहां से हटाकर टंकी चौक पर स्थापित करने की है।
आधार और संरचना की जांच की गई
मंदिर के पुजारी महेश बैरागी ने बताया कि प्रतिमा को सीधे हटाने में उसके खंडित होने का खतरा है। इसी वजह से प्रतिमा के नीचे करीब डेढ़ फीट गड्ढा खोदकर उसके आधार और संरचना की जांच की गई।
उनका कहना है कि विशेषज्ञों ने पहले प्रतिमा की स्कैनिंग कराने की सलाह दी है। इसके लिए विशेष मशीन मंगाई जा रही है। स्कैनिंग के बाद ही प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से शिफ्ट करने का फैसला लिया जाएगा।
मंदिर का इतिहास 1857 से पहले का
शालू यादव ने खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा हटाने की प्रशासन की कार्रवाई का विरोध जताया। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले पर मीडिया के जरिए पूरे प्रदेश की नजर बनी हुई है।
शालू यादव ने मंदिर के ऐतिहासिक महत्व का जिक्र करते हुए कहा कि इसका इतिहास 1857 से भी पहले का है और यह अंग्रेजों के समय से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि अभी की सरकारें बाद में आई हैं, इसलिए प्रशासन को मंदिर की ऐतिहासिक और धार्मिक आस्था का ध्यान रखना चाहिए।
उन्होंने बताया कि शनिवार को प्रतिमा के पास गड्ढा खोदकर उसकी स्थिति और आधार की जांच की गई। उनके मुताबिक, यह तीसरा प्रयास भी कामयाब नहीं हुआ। उन्होंने इसे बाबा का संकेत बताते हुए प्रशासन से प्रतिमा हटाने की कार्रवाई रोककर इसी स्थान पर भव्य मंदिर के दोबारा बनाने की मांग की।