शाजापुर। उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि NEET और JEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए मध्यप्रदेश में नि:शुल्क कोचिंग की शुरुआत शाजापुर जिले से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में की जा रही है। प्रधानमंत्री द्वारा 15 अगस्त को लाल किले से विद्यार्थियों के लिए निशुल्क कोचिंग की दिशा में किए गए आह्वान के बाद प्रदेश सरकार ने इस योजना पर तेजी से काम शुरू किया है।
शाजापुर पहुंचे मंत्री इंदर सिंह परमार ने मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि पायलट प्रोजेक्ट के लिए शाजापुर जिले का चयन किया गया है। इसके तहत विद्यार्थियों का पंजीयन कराया गया और 30 अगस्त को चयन परीक्षा आयोजित की गई। इसमें 6600 से अधिक विद्यार्थियों ने पंजीयन कराया था, जबकि परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद 1700 से अधिक विद्यार्थियों का चयन किया गया है।
सभी CM Rise स्कूलों में बनाए जाएंगे सेंटर
मंत्री परमार ने बताया कि शुरुआत में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक कोचिंग सेंटर खोलने की योजना थी, लेकिन विद्यार्थियों की संख्या अधिक होने के कारण अब जिले के सभी CM Rise स्कूलों में कोचिंग सेंटर बनाए जाएंगे। शाजापुर के उत्कृष्ट विद्यालय में भी सेंटर शुरू किया जाएगा।
मोहन बड़ोदिया और कालापीपल क्षेत्र में स्कूलों में पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में संबंधित कॉलेजों को कोचिंग सेंटर के रूप में उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा यदि किसी क्षेत्र में निजी स्कूलों के विद्यार्थियों की संख्या अधिक होती है तो अनुमति लेकर निजी स्कूलों में भी सेंटर बनाए जाने पर विचार किया जाएगा।
17 तारीख को चयनित विद्यार्थियों का होगा सम्मान
मंत्री परमार ने बताया कि 17 सितंबर को चयनित विद्यार्थियों का सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। इस दौरान विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र भी प्रदान किए जाएंगे। CM Rise यानी सांदीपनि विद्यालय, गुलाना में भव्य कार्यक्रम आयोजित कर जिले में निशुल्क कोचिंग की औपचारिक शुरुआत की जाएगी।
मंत्री ने कहा कि शाजापुर मध्यप्रदेश का पहला जिला होगा, जहां प्रधानमंत्री के इस संकल्प को सरकार और संगठन मिलकर आगे बढ़ाने का काम करेंगे। इस पहल का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर एवं प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को NEET और JEE जैसी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी का अवसर उपलब्ध कराना है।
मंत्री परमार ने कहा कि निशुल्क कोचिंग के माध्यम से विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन और बेहतर शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराने पर सरकार का विशेष फोकस है।