चित्तौड़गढ़। मधुर गायिका पूज्य प्रतिभा जी म.सा. ठाणा-4 के पावन सानिध्य एवं राष्ट्र संत कमल मुनि जी कमलेश की प्रेरणा से श्री जैन दिवाकर विचार मंच की ओर से शिक्षक दिवस के अवसर पर धार्मिक पाठशालाओं में सेवा दे रहे जैन अध्यापक-अध्यापिकाओं का भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया गया।
विचार मंच के राष्ट्रीय सलाहकार राजेश सेठिया ने बताया कि नगर की विभिन्न धार्मिक पाठशालाओं में सेवाएं दे रहे अध्यापक-अध्यापिकाओं को मंच की ओर से कुमकुम तिलक, माला, उपरना एवं उपहार भेंट कर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर मंच की राष्ट्रीय मंत्री महिला शाखा संगीता चिप्पड़ ने कहा कि जैन धर्म में गुरु का स्थान सर्वाेपरि है। शिक्षक केवल शिक्षा प्रदान नहीं करता, बल्कि संस्कार और दिशा देकर समाज एवं राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
समारोह में इंदिरा धाकड़, हेमा बोहरा, प्रकाश जैन, नीता डांगी, इंदु बाफना, दिलखुश जी खींवड़िया, आशा पोखरना, लतिका मेहता, रीना मेहता, सुषमा नाहर, चंदा जी भड़कतिया, नेहा जी सुराणा, रिंकू कोठारी, रजनी रांका, स्वीटी भड़कतिया सहित अन्य अध्यापक-अध्यापिकाओं का सम्मान किया गया।
कार्यक्रम में श्री जैन दिवाकर विचार मंच के जिला अध्यक्ष प्रकाश नाहर, सेती संघ अध्यक्ष अनिल पोखरना, कोषाध्यक्ष रतन संचेती, चित्तौड़गढ़ अध्यक्ष किरण डांगी, निर्मला बंब, रीना बाफना, मंजू नाहटा, पुष्पा नाहर, रेखा जारोली, सुशीला छाजेड़ सहित समाज के अनेक गणमान्य श्रावक उपस्थित रहे।
समारोह के दौरान वक्ताओं ने कहा कि धार्मिक पाठशालाओं में सेवाएं दे रहे अध्यापक-अध्यापिकाएं नई पीढ़ी को धर्म, संस्कार और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। ऐसे सम्मान समारोह उनके योगदान को प्रोत्साहन देने के साथ समाज में शिक्षा और संस्कारों के प्रति जागरूकता बढ़ाते हैं।