सेंधवा। आज जब ज्ञान मोबाइल की एक क्लिक पर मिल जाता है, जब बच्चे गुरु से ज्यादा गूगल पर भरोसा करते हैं, तब भी सेंधवा में एक शख्स है जो आज भी चॉक-डस्टर से ही भविष्य गढ़ रहा है। नाम है - दिनेश गुप्ता।
इन्हीं के लिए कहा गया है - "गुरु कुम्हार शिष कुंभ है, गढ़ि-गढ़ि काढ़ै खोट।"
ऐसे ही तपस्वी शिक्षक की साधना को नमन करने के लिए लायंस क्लब सेंधवा ने शिक्षक दिवस पर अपने सबसे प्रतिष्ठित सम्मान 'सांदीपनी सम्मान-2026' से उन्हें अलंकृत किया। यह सम्मान श्रीमती पुनीता नेहरू के कर-कमलों से प्रदान किया गया। इस अवसर पर दिनेश गुप्ता को शॉल ओढ़ाकर, श्रीफल व स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
क्लब के सम्मान पत्र में उल्लेख है - "पुराणों ने ज्ञान यज्ञ को सबसे बड़ा यज्ञ कहा है, वेदों ने ज्ञान को ही असली धन कहा है। आपने इस धन को तिजोरी में बंद नहीं किया, बल्कि सेंधवा के हजारों छात्रों में बांट दिया। यही आपका अग्निहोत्र है, यही आपका यज्ञ है।"
इस अवसर पर श्रीमती पुनीता नेहरू ने कहा - "डिग्रियां तो बाजार में मिल जाती हैं, पर संस्कार देने वाला शिक्षक किस्मत से मिलता है। दिनेश गुप्ता उसी किस्मत का नाम हैं।"
कार्यक्रम में लायंस क्लब अध्यक्ष MJF श्यामसुंदर तायल, सचिव MJF संजय अग्रवाल, शिक्षा समिति चेयरमैन श्याम तायल और कोषाध्यक्ष पीयूष दुबे उपस्थित रहे।