भगवानपुरा। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चे के आह्वान पर मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों के शिक्षकों ने गांधी जयंती के अवसर पर भोपाल के नीलम पार्क में एक दिवसीय उपवास रखकर धरना-प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) सहित प्रथम नियुक्ति दिनांक से शासकीय सेवक मानते हुए सेवा अवधि की गणना करने और ई-अटेंडेंस जैसी अव्यावहारिक उपस्थिति व्यवस्था को समाप्त करने की मांग उठाई।
अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चे द्वारा अपनी विभिन्न मांगों को लेकर भोपाल में 27 सितंबर से अनशन एवं धरना प्रदर्शन किया जा रहा है। इसी क्रम में 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर इंदौर संभाग सहित खरगोन, इंदौर, बुरहानपुर, धार, झाबुआ, अलीराजपुर और खंडवा जिलों के शिक्षक नीलम पार्क पहुंचे और एक दिवसीय उपवास रखते हुए धरना दिया।
धरना प्रदर्शन के दौरान वरिष्ठ प्रांतीय उपाध्यक्ष हबीबुल्लाह खान, संगठन महासचिव गोपीचंद सहिते, प्रभुराम मालवीय, जगदीश यादव, राकेश दुबे, परमानंद डेहरिया, राकेश पटेल, डीके सिंघौर, अमित शर्मा, दिनेश पटेल, ग्यारसीलाल पटेल, सुनीता वर्मा, अतीक खान, बाबूलाल कुशवाह, शाकिर कुरैशी, यदुनंदन बडोले, भारत डावर सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए।
20-30 वर्ष सेवा के बाद टीईटी का विरोध-
वक्ताओं ने कहा कि पात्रता परीक्षा सामान्यतः नियुक्ति से पूर्व आयोजित की जाती है। अध्यापक शिक्षक संवर्ग के अनेक शिक्षक पिछले 20 से 30 वर्षों से शिक्षा विभाग एवं आदिम जाति कल्याण विभाग में सेवाएं दे रहे हैं और हर वर्ष बेहतर परीक्षा परिणाम देने में योगदान कर रहे हैं। ऐसे में 20 से 30 वर्ष की सेवा के बाद उनसे शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) लेना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों की गुणवत्ता और दक्षता बढ़ाने के लिए परीक्षा के बजाय विभागीय प्रशिक्षण की व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि शिक्षक अपने ज्ञान और कौशल को और बेहतर कर सकें। वक्ताओं ने कहा कि एक दिन की टीईटी परीक्षा से शिक्षक की गुणवत्ता का निर्धारण करना उचित नहीं है।
प्रथम नियुक्ति से सेवा अवधि की गणना की मांग-
शिक्षकों ने कहा कि वर्ष 1995 से 1998 के बीच नियुक्त शिक्षा कर्मियों, गुरुजियों, संविदा शिक्षकों और अध्यापकों सहित नवीन शिक्षक संवर्ग के कर्मचारियों की सेवा अवधि वर्ष 2018 से मानी जा रही है। इसके कारण शिक्षकों को ग्रेच्युटी, अवकाश नकदीकरण सहित अन्य सेवा लाभों में आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
मोर्चे ने मांग की कि सभी संबंधित शिक्षकों की सेवा अवधि की गणना उनकी प्रथम नियुक्ति दिनांक से की जाए और उसी आधार पर उन्हें सभी सेवा लाभ प्रदान किए जाएं।
पुरानी पेंशन और ई-अटेंडेंस का मुद्दा भी उठाया-
वक्ताओं ने कहा कि नवीन शिक्षक संवर्ग से सेवानिवृत्त हुए कुछ शिक्षकों को बहुत कम पेंशन मिल रही है। उन्होंने सरकार से पुरानी पारिवारिक पेंशन व्यवस्था लागू करने की मांग की, ताकि सेवानिवृत्त शिक्षक सम्मानजनक जीवन जी सकें।
ई-अटेंडेंस व्यवस्था का भी शिक्षकों ने विरोध किया। उनका कहना था कि शिक्षकों के लिए ऐसी उपस्थिति प्रणाली लागू की गई है, जो व्यावहारिक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है। मोर्चे ने मांग की कि प्रदेश के सभी विभागों में समानता के आधार पर एक जैसी उपस्थिति प्रणाली लागू की जाए और शिक्षकों के लिए ई-अटेंडेंस व्यवस्था को तत्काल निरस्त किया जाए।
शिक्षक नेताओं ने कहा कि शिक्षक नियमित रूप से विद्यालय पहुंचकर विद्यार्थियों को शिक्षा देने के साथ गांव और समाज में अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं। उन्होंने सरकार से शिक्षकों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र समाधान करने की मांग की।