नीमच। शहर के प्रमुख फव्वारा चौक क्षेत्र में स्थित मुस्लिम सराय इन दिनों बदहाली और उपेक्षा को लेकर चर्चा में है। मुस्लिम समाज से जुड़ी इस वक्फ संपत्ति के वर्तमान स्वरूप को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता एवं पूर्व पार्षद हारून रशीद कुरैशी ने मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड के प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए इसके संरक्षण और उचित उपयोग की मांग की है।
कुरैशी ने कहा कि शहर के मध्य स्थित यह संपत्ति मुस्लिम समाज के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है। यदि इसका संरक्षण, रखरखाव और व्यवस्थित प्रबंधन किया जाए तथा वाकिफ की मंशा के अनुरूप इसका उपयोग सुनिश्चित हो, तो समाज के जरूरतमंद लोगों को विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं।
उन्होंने कहा कि मुख्य और व्यावसायिक क्षेत्र में स्थित होने के बावजूद संपत्ति का उपयोग उसकी क्षमता के अनुरूप नहीं हो पा रहा है। वक्फ संपत्तियों का उद्देश्य केवल भूमि या भवन का संरक्षण करना नहीं, बल्कि वक्फनामा में निर्धारित शर्तों और वाकिफ की मंशा के अनुरूप समाज एवं जरूरतमंदों को लाभ पहुंचाना भी है।
बेहतर प्रबंधन से बन सकती है उपयोगी संपत्ति-
पूर्व पार्षद कुरैशी ने कहा कि वक्फ बोर्ड गंभीरता से पहल करे तो मुस्लिम सराय को समाज के लिए उपयोगी केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है। यहां जरूरतमंद यात्रियों के लिए बेहतर सराय व्यवस्था के साथ गरीब परिवारों की सहायता, विद्यार्थियों के लिए अध्ययन सुविधा, सामाजिक एवं सामुदायिक गतिविधियों तथा अन्य जनकल्याणकारी कार्यों के लिए संसाधन विकसित किए जा सकते हैं। हालांकि, इन सभी कार्यों को संबंधित वक्फ की शर्तों और लागू नियमों के अनुरूप किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज में गरीब, अनाथ, विधवा, बुजुर्ग, विद्यार्थी और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की अनेक आवश्यकताएं हैं। ऐसी वक्फ संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन इन जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
वक्फ संपत्ति को अमानत समझकर हो पारदर्शी प्रबंधन-
कुरैशी ने कहा कि वक्फ संपत्ति किसी व्यक्ति या संस्था की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि एक अमानत है। इसलिए इसके प्रबंधन में पारदर्शिता, जवाबदेही और वाकिफ की मंशा का सम्मान प्राथमिकता होना चाहिए।
उन्होंने मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड से मांग की कि नीमच की मुस्लिम सराय की वर्तमान स्थिति की जांच कराई जाए और रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि संपत्ति का वर्तमान उपयोग वक्फनामा और वाकिफ की मंशा के अनुरूप है या नहीं।
कुरैशी ने कहा कि यदि वक्फ बोर्ड इच्छाशक्ति के साथ इस संपत्ति का संरक्षण और उचित प्रबंधन करे तो वर्तमान में बदहाली की तस्वीर पेश कर रही यह संपत्ति भविष्य में मुस्लिम समाज के लिए आय और जनकल्याण का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है। उन्होंने कहा कि मुद्दा किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि वक्फ अमानत के संरक्षण और उसके मूल उद्देश्य को पूरा कराने का है।