चित्तौड़गढ़। राजस्थान सरकार के पूर्व राज्यमंत्री सुरेंद्रसिंह जाड़ावत ने केंद्र सरकार की नई अफीम नीति को लेकर भाजपा सरकार और उसके जनप्रतिनिधियों पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि अफीम किसानों को पहले 10 आरी के पट्टे जारी करने का भरोसा दिलाया गया, लेकिन अब सीपीएस (CPS) पद्धति के तहत 5 आरी के पट्टे देने की नीति से किसानों के साथ अन्याय हो रहा है। उनके अनुसार, इस निर्णय से अफीम काश्तकारों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है।
जाड़ावत ने कहा कि स्थानीय सांसद ने बूंद-बूंद सिंचाई योजना के तहत अफीम किसानों को 10 आरी के पट्टों पर बुवाई करने और पट्टे जारी होने का भरोसा दिलाया था। इस आश्वासन पर विश्वास करते हुए कई किसानों ने अपने खेतों में 10-10 आरी के हिसाब से फव्वारा सिंचाई व्यवस्था स्थापित करने पर बड़ी राशि खर्च की। किसानों ने अपनी जमा-पूंजी लगाने के साथ कर्ज लेकर भी खेती की तैयारी की, लेकिन अब नई नीति के कारण उनके सामने आर्थिक संकट की स्थिति बन रही है।
पूर्व राज्यमंत्री ने सवाल उठाया कि जब किसानों को 10 आरी के पट्टे देने का भरोसा दिलाया गया था, तो अब 5 आरी के पट्टों की नीति क्यों लाई जा रही है? उन्होंने पूछा कि जनप्रतिनिधियों के आश्वासन पर भरोसा करके निवेश करने वाले किसानों को होने वाले आर्थिक नुकसान की जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या भाजपा के जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर जवाब देंगे?
जाड़ावत ने आरोप लगाया कि भाजपा के जनप्रतिनिधि चुनाव के समय किसानों के हितों की बात करते हैं, लेकिन जब उनके भविष्य और मेहनत की कमाई का सवाल आता है, तो उनकी चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि यदि किसानों ने 10 आरी के पट्टों की उम्मीद में सिंचाई व्यवस्था पर निवेश किया है, तो सरकार को नीति बनाते समय उनकी परिस्थितियों और खर्च का ध्यान रखना चाहिए था।
उन्होंने कहा कि अफीम की खेती इस क्षेत्र के हजारों किसानों की आजीविका का प्रमुख आधार है। किसान पहले से ही बढ़ती लागत, महंगे कृषि संसाधनों और मौसम की अनिश्चितताओं का सामना कर रहे हैं। ऐसे में अफीम नीति में बदलाव से किसानों के बीच असमंजस बढ़ रहा है और उनके आर्थिक हित प्रभावित होने की आशंका है।
जाड़ावत ने मांग की कि सरकार अफीम किसानों की समस्याओं और उनके किए गए निवेश को ध्यान में रखते हुए नीति पर पुनर्विचार करे, ताकि किसानों को राहत मिल सके और उन्हें आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।