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October 29, 2026, 5:50 pm
BIG NEWS : अफीम नीति के खिलाफ मालवा से मेवाड़ तक विरोध की आग, मंदसौर में कांग्रेस ने खोला मोर्चा तो चित्तौड़गढ़ में किसानों ने सरकार को घेरा, पुराने पट्टों की बहाली, नए पट्टों और मॉर्फिन सीमा में राहत की मांग से गरमाया माहौल, पढ़े रवि पोरवाल के साथ संजय खाबिया की खबर 

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मंदसौर/चित्तौड़गढ़। केंद्र सरकार की अफीम नीति 2026-27 को लेकर मध्य प्रदेश और राजस्थान के अफीम उत्पादक क्षेत्रों में विरोध तेज होता दिखाई दे रहा है। मंदसौर में कांग्रेस ने नारकोटिक्स कार्यालय पर प्रदर्शन कर नीति में संशोधन की मांग उठाई। वहीं चित्तौड़गढ़ में अफीम किसानों ने कलेक्ट्रेट चौराहे पर करीब दो घंटे तक धरना देकर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। किसानों की प्रमुख मांगों में मॉर्फिन की पात्रता सीमा में राहत, पुराने बंद पट्टों की बहाली और नए पट्टे जारी करना शामिल है। इसी बीच मंदसौर में कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान मीडिया कवरेज को लेकर विवाद भी सामने आया, जहां एक पत्रकार के साथ कथित धक्का-मुक्की और बदसलूकी के आरोप लगे हैं।

मंदसौर में कांग्रेस ने उठाई किसानों के हक की आवाज-
मंदसौर स्थित नारकोटिक्स कार्यालय पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अफीम नीति के विरोध में प्रदर्शन किया। इस दौरान कांग्रेस नेत्री रूपल संचेती ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि करवाचौथ के दिन मातृशक्ति किसानों के अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए मैदान में उतरी है। उन्होंने कहा कि किसान सरकारी नीतियों के साथ-साथ मौसम की मार से भी परेशान हैं।

किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज कर रही सरकार- 
रूपल संचेती ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है और मनमाने फैसले ले रही है। उन्होंने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा के लिए नीति में आवश्यक संशोधन किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने किसान और मातृशक्ति से अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने की अपील की।

चित्तौड़गढ़ में दो घंटे प्रदर्शन, प्रशासन को सौंपा ज्ञापन-
नई अफीम नीति के विरोध में चित्तौड़गढ़ में भी किसानों ने नाराजगी जताई। किसानों ने कलेक्ट्रेट चौराहे पर करीब दो घंटे तक प्रदर्शन किया और इसके बाद जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारी किसान प्रशासन को ज्ञापन देने के बाद सांसद कार्यालय भी पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर विरोध दर्ज कराया।

मार्फिन की सीमा घटाकर 4.0 करने की मांग- 
भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में किसान नीति में संशोधन, पुराने बंद पट्टों की बहाली और नए पट्टे जारी करने की मांग कर रहे हैं। किसान संघ का कहना है कि मॉर्फिन की पात्रता सीमा 4.4 किए जाने से पारंपरिक लुवाई-चिराई पद्धति से खेती करने वाले कई किसानों को पट्टे की पात्रता से बाहर होने का डर है। संघ ने सीमा घटाकर 4.0 करने और किसानों को राहत देने की मांग की है।

मांगें पूरी नहीं होने से किसानों में निराशा- 
भारतीय किसान संघ के प्रांतीय पदाधिकारी सोहन अंजना के अनुसार सितंबर में नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ किसान प्रतिनिधियों की बैठक हुई थी। किसानों को उम्मीद थी कि उनकी मांगों को नई नीति में शामिल किया जाएगा, लेकिन नीति जारी होने के बाद कई प्रमुख मांगें पूरी नहीं होने से निराशा है।

दो लाख नए पट्टे और अफीम का समर्थन मूल्य बढ़ाने की मांग-
किसान संघ ने वर्ष 1990 से अब तक विभिन्न कारणों से बंद या निरस्त किए गए पट्टों को बहाल करने और कम से कम दो लाख नए पट्टे जारी करने की मांग उठाई है। इसके अलावा अफीम का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढाने, सीपीएस व्यवस्था में बदलाव, डोडे को एनडीपीएस एक्ट के दायरे से बाहर करने तथा हर साल नई नीति जारी करने के बजाय स्थायी और पारदर्शी नीति लागू करने की मांग भी रखी गई है।

आंदोलन को बढ़ाने की दी चेतावनी- 
संघ ने अफीम उत्पादक क्षेत्रों के सांसदों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर किसानों की मांगों को केंद्र सरकार और वित्त मंत्रालय के सामने रखने की अपील की है। साथ ही चेतावनी दी है कि मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को अन्य अफीम उत्पादक क्षेत्रों तक विस्तारित किया जाएगा।
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कांग्रेस के प्रदर्शन में पत्रकार से कथित बदसलूकी, कवरेज बंद
मंदसौर में कांग्रेस के नारकोटिक्स कार्यालय घेराव कार्यक्रम के दौरान मीडिया कवरेज को लेकर भी विवाद सामने आया। आईएनएच-हरिभूमि के संवाददाता के साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की और बदसलूकी करने तथा कवरेज से रोकने के आरोप कांग्रेस के पूर्व विधायक नवकृष्ण पाटिल और उनके पुत्र आदित्य पाटिल पर लगे हैं। घटना के बाद मौके पर मौजूद पत्रकारों में नाराजगी फैल गई और विरोध स्वरूप पत्रकारों ने कार्यक्रम की कवरेज बंद कर दी। 

भाजपा के पूर्व विधायक यशपाल सिंह ने की घटना की निंदा-  
पत्रकारों का कहना है कि मीडिया को स्वतंत्र रूप से अपना दायित्व निभाने का अधिकार है और किसी पत्रकार को कवरेज से रोकना या उसके साथ दुर्व्यवहार करना गंभीर विषय है। भाजपा के पूर्व विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर घटना की निंदा की। फिलहाल, मामले में संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

अब सरकार के फैसले पर किसानों की नजर-
अफीम नीति को लेकर मंदसौर और चित्तौड़गढ़ में उठ रही आवाजों के बीच किसानों को उम्मीद है कि केंद्र सरकार उनकी मांगों पर विचार करेगी। किसान संगठनों ने नीति में संशोधन कर राहत देने की मांग की है। अब देखना होगा कि सरकार किसानों की मांगों पर क्या कदम उठाती है और विरोध के बाद नीति में किसी बदलाव की घोषणा होती है या नहीं।

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