मंदसौर। मालवा-मेवाड़ अंचल के अफीम उत्पादक किसानों के लिए नई अफीम नीति 2026-27 का इंतजार लगातार बढ़ता जा रहा है। अफीम की बोवनी का समय नजदीक आने के साथ ही नीति जारी होने में हो रही देरी को लेकर किसानों की चिंता और नाराजगी भी बढ़ने लगी है। एक ओर किसान नेता श्यामलाल जोकचंद के नेतृत्व में किसानों ने पैदल मार्च निकालकर जिला अफीम अधिकारी कार्यालय का घेराव किया और सरकार को 27 अक्टूबर तक नीति जारी करने का अल्टीमेटम दिया। वहीं दूसरी ओर भाजपा नेताओं और जनप्रतिनिधियों की ओर से जल्द नीति जारी होने की उम्मीद जताई जा रही है। ऐसे में अफीम नीति को लेकर किसानों के बीच असमंजस के साथ-साथ राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।
किसानों का पैदल मार्च, अफीम अधिकारी कार्यालय का घेराव-
अफीम नीति में देरी के विरोध में गुरुवार को किसान नेता श्यामलाल जोकचंद के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान सरदार वल्लभ भाई पटेल चौराहे पर एकत्रित हुए। यहां से पैदल मार्च निकालते हुए किसान जिला अफीम अधिकारी कार्यालय पहुंचे और घेराव कर ज्ञापन सौंपा। किसानों का कहना है कि नीति जारी नहीं होने से आगामी फसल की तैयारी, लाइसेंस और पट्टों को लेकर असमंजस बना हुआ है। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने पात्र किसानों को चीरा वाले पट्टे देने, वर्ष 1997-98 में निरस्त पट्टों की बहाली, नए पात्र किसानों को लाइसेंस जारी करने और अफीम का उचित मूल्य निर्धारित करने की मांग उठाई। इसके अलावा सीपीएस पद्धति और डोडाचूरा से संबंधित नियमों में किसान हितैषी बदलाव करने की मांग भी की गई।
जोकचंद ने 27 अक्टूबर तक का दिया अल्टीमेटम-
किसान नेता श्यामलाल जोकचंद ने सरकार को 27 अक्टूबर तक नई अफीम नीति जारी करने का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि निर्धारित समय सीमा तक नीति जारी नहीं होने पर आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। किसानों के प्रदर्शन से स्पष्ट है कि बोवनी के महत्वपूर्ण समय में नीति को लेकर अनिश्चितता उनके लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश दीक्षित ने जताई जल्द घोषणा की उम्मीद-
दूसरी ओर भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश दीक्षित ने 21 अक्टूबर को जारी प्रेस नोट में दावा किया था कि आगामी दो से तीन दिनों में नई अफीम नीति जारी होने की संभावना है। उनके अनुसार, उन्होंने प्रदेश के डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा, भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद बंशीलाल गुर्जर और सांसद सुधीर गुप्ता से इस संबंध में चर्चा की है। दीक्षित के मुताबिक नेताओं ने जल्द किसान हितैषी नीति जारी होने का भरोसा दिलाया है। उन्होंने किसानों से खेतों की तैयारी जारी रखने की अपील की। हालांकि, यह समयसीमा उनका दावा है, केंद्र सरकार की ओर से घोषित आधिकारिक तारीख नहीं।
सांसद सुधीर गुप्ता ने भी किसानों से खेत तैयार रखने को कहा-
सांसद सुधीर गुप्ता ने 13 अक्टूबर को किसानों को संदेश देते हुए बताया था कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी और संबंधित अधिकारियों से अफीम नीति को लेकर चर्चा हुई है। उन्होंने किसानों से खेतों की तैयारी जारी रखने की अपील करते हुए जल्द नीति जारी होने की उम्मीद जताई थी।
बंशीलाल गुर्जर के बयान से भी बढ़ी उम्मीद-
राज्यसभा सांसद बंशीलाल गुर्जर को लेकर सामने आई जानकारी में भी नई अफीम नीति जल्द जारी होने की संभावना जताई गई है। बताया गया कि उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्रालय और नारकोटिक्स विभाग के अधिकारियों के साथ नीति तथा किसानों के हितों से जुड़े विषयों पर चर्चा की। इसके बाद आगामी दो दिनों में नीति जारी होने की संभावना का दावा सामने आया। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
पुराने पट्टों, सीपीएस और अफीम के मूल्य पर नजर-
नई नीति में किसान पुराने पट्टों की बहाली, नए लाइसेंस, सीपीएस पद्धति, डोडाचूरा से जुड़े नियमों और अफीम के उचित मूल्य को लेकर स्पष्ट निर्णय चाहते हैं। किसानों को उम्मीद है कि नई नीति में उनकी मांगों पर विचार कर राहत देने वाले प्रावधान शामिल किए जाएंगे।
27 अक्टूबर तक फैसले का इंतजार-
मालवा-मेवाड़ में अफीम नीति को लेकर अब किसानों के आंदोलन और नेताओं के दावों के बीच सबकी निगाहें केंद्र सरकार की घोषणा पर टिकी हैं। किसानों ने 27 अक्टूबर तक नीति जारी करने की मांग की है, जबकि भाजपा नेताओं ने जल्द घोषणा की उम्मीद जताई है। अब देखना होगा कि सरकार समय सीमा के भीतर नीति जारी करती है या किसानों का आंदोलन आगे बढ़ता है।