नीमच। अफीम उत्पादक क्षेत्र के किसानों के लिए इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा कि सांसद सीपी जोशी की केंद्रीय वित्त मंत्री से प्रत्यक्ष मुलाकात के बावजूद अब तक अफीम नीति 2026-27 की घोषणा की तारीख सामने नहीं आई है। इससे अफीम उत्पादक किसानों में चिंता और निराशा का माहौल बना हुआ है।
यदि नब्बे के दशक की बात करें, तो उस समय मंदसौर के सांसद बैरागी ने केंद्र सरकार के समक्ष क्षेत्र के अफीम किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया था। उस दौरान केंद्र में प्रणब मुखर्जी वित्त मंत्री थे। ओलावृष्टि के कारण अफीम की फसल को भारी नुकसान पहुंचने पर किसानों को राहत दिलाने के लिए प्रयास किए गए थे। किसानों को औसत में छूट तथा शून्य औसत पर अफीम उत्पादन करने के लिए पट्टे दिलाकर राहत प्रदान की गई थी।
वर्तमान परिस्थितियों में अफीम नीति की घोषणा को लेकर मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री, मंदसौर जिले के दो सांसद तथा चित्तौड़गढ़ जिले से भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद पिछले दो माह से लगातार प्रयासरत बताए जा रहे हैं। इसके बावजूद अब तक नीति की घोषणा की तारीख सामने नहीं आने से किसानों की बेचैनी बढ़ रही है।
ऐसे में तथाकथित जागरूक सांसद रत्न एवं सांसद सुधीर गुप्ता तथा भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद बंशीलाल गुर्जर की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। अफीम उत्पादक किसानों के हित में इन जनप्रतिनिधियों ने अब तक क्या प्रयास किए हैं? किसानों को इसका स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए।
किसानों का यह भी सवाल है कि अफीम नीति 2026-27 में पिछली नीति की तुलना में क्या बेहतर प्रावधान किए जाएंगे और उनसे किसानों को क्या लाभ मिलेगा? जनप्रतिनिधियों को चाहिए कि वे नई नीति जारी होने से पहले ही उसके संभावित लाभों के बारे में किसानों को जानकारी दें, ताकि लंबे समय से इंतजार कर रहे किसानों को राहत और आश्वासन मिल सके।
अफीम उत्पादक किसानों को अब केवल आश्वासनों की नहीं, बल्कि ठोस परिणामों की आवश्यकता है। सरकार और जनप्रतिनिधियों को किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए अफीम नीति 2026-27 की घोषणा की तारीख स्पष्ट करवाने तथा किसानों के हित में लाभकारी प्रावधान सुनिश्चित करने की दिशा में प्रभावी पहल करनी चाहिए।