मंदसौर। केंद्र सरकार द्वारा अफीम नीति 2026-27 जारी किए जाने के बाद पूर्व विधायक एवं भाजपा नेता यशपाल सिसोदिया ने इसे अफीम उत्पादक किसानों के लिए राहत भरा कदम बताया। उन्होंने कहा कि नीति जारी होने में कुछ देरी जरूर हुई, लेकिन नए प्रावधानों से किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
सिसोदिया ने बताया कि निर्धारित मानदंडों को पूरा करने वाले सीपीएस श्रेणी के किसानों को पांच वर्ष तक लाइसेंस जारी रखने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, करीब एक दशक पहले कम औसत के कारण लाइसेंस गंवाने वाले कुछ किसानों को भी सीपीएस पद्धति के तहत दोबारा अवसर देने की बात कही। उन्होंने कहा कि नई नीति में 4.4 किलोग्राम मार्फिन औसत को भी महत्वपूर्ण मानदंड बनाया गया है।
नीति जारी होने में देरी को लेकर कांग्रेस की आलोचना पर सिसोदिया ने कहा कि केंद्र सरकार निर्धारित प्रक्रियाओं और रिपोर्टों के आधार पर निर्णय लेती है। उन्होंने दावा किया कि देरी के बावजूद किसानों में निराशा की स्थिति नहीं है और कोई किसान इस कारण अपना पट्टा सरेंडर नहीं करेगा।
वहीं, वर्ष 1997-98 के दौरान कटे पट्टों को नई नीति में शामिल नहीं किए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि नीति में पिछले दशक में कम औसत के कारण लाइसेंस गंवाने वाले किसानों के लिए प्रावधान किए गए हैं। कांग्रेस के इस आरोप पर कि पट्टे बढ़ाने के दावे जमीन पर दिखाई नहीं दे रहे, सिसोदिया ने कहा कि लाइसेंस निर्धारित औसत और गुणवत्ता संबंधी मानकों के आधार पर तय होते हैं। उन्होंने केंद्र सरकार को किसान हितैषी बताते हुए नई नीति का समर्थन किया।