मंदसौर। धनतेरस के पावन पर्व पर मंदसौर के खिलचीपुरा स्थित प्रसिद्ध कुबेरधाम में भगवान कुबेर के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। श्रद्धालु परिवार की सुख-समृद्धि और आर्थिक उन्नति की कामना लेकर धन के देवता भगवान कुबेर के दरबार में पहुंचे।
श्री धौलागढ़ महादेव मंदिर के नाम से प्रसिद्ध यह मंदिर करीब 1200 वर्ष पुराना बताया जाता है। मंदिर के गर्भगृह में भगवान शिव के साथ माता पार्वती, भगवान गणेश और भगवान कुबेर विराजमान हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उत्तराखंड के केदारनाथ के बाद मंदसौर ऐसा विशेष स्थान है, जहां भगवान कुबेर को शिव पंचायत में स्थान प्राप्त है।
पुरातत्व विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर गुप्तकाल यानी सातवीं शताब्दी की यह प्रतिमा करीब तीन फीट ऊंची है। इसमें चार भुजाओं और बड़े उदर वाले भगवान कुबेर अपने वाहन नेवले पर सवार दिखाई देते हैं। वर्ष 1978 में इस दुर्लभ प्रतिमा की पहचान कुबेर देव के रूप में की गई थी। बाद में मराठाकाल में मंदिर के जीर्णाेद्धार के दौरान इसे गर्भगृह में स्थापित किया गया।
महाभिषेक और महाआरती के साथ हुए धार्मिक अनुष्ठान-
धनतेरस पर मंदिर में ब्रह्म मुहूर्त से ही धार्मिक अनुष्ठान शुरू हो गए। भगवान शिव और कुबेर का महाभिषेक, विशेष पूजन और आकर्षक श्रृंगार किया गया। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन और महाआरती संपन्न हुई। धन-संपदा के अधिष्ठाता भगवान कुबेर के पूजन का धनतेरस पर विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। सुबह से देर रात तक श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहने की संभावना रही।
कलेक्टर और नपा अध्यक्ष ने किया निरीक्षण-
धनतेरस पर उमड़ी भीड़ को देखते हुए कलेक्टर दिव्यांक सिंह ने मंदिर पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने श्रद्धालुओं को पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि दर्शन के दौरान किसी को असुविधा न हो, इसके लिए प्रशासन लगातार निगरानी रख रहा है।
वहीं, नगर पालिका अध्यक्ष रमा देवी गुर्जर ने भी कुबेरधाम पहुंचकर भगवान के दर्शन किए। उन्होंने मंदसौर को भगवान पशुपतिनाथ और नालछा माता की ऐतिहासिक नगरी बताते हुए कुबेरधाम को शहर की प्रमुख धार्मिक पहचान बताया।