नीमच। दीपावली से दो दिन पहले मनाया जाने वाला धनतेरस का पर्व सुख, समृद्धि और धन-वैभव का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन नई वस्तुएं और धन-समृद्धि से जुड़ी चीजें खरीदना शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि धनतेरस पर की गई खरीदारी से घर में सालभर सुख-समृद्धि और बरकत बनी रहती है।
लेकिन आधुनिकता और तकनीक के इस दौर में भी हमारी प्राचीन परंपराएं और धार्मिक मान्यताएं किस तरह जीवित हैं, इसकी एक अनूठी झलक नीमच में देखने को मिली। यहां महिलाएं आज भी सदियों पुरानी परंपरा को पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ निभाती आ रही हैं।
इस परंपरा के तहत धनतेरस की अलसुबह करीब 4 बजे महिलाएं खदानों पर पहुंचती हैं। वहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के बाद पीली मिट्टी खोदी जाती है। इसके बाद इस मिट्टी से पांच छोटे-छोटे लड्डू बनाए जाते हैं और उन्हें श्रद्धापूर्वक घर लाया जाता है।
खास बात यह है कि महिलाएं इन पांच मिट्टी के लड्डुओं को माता लक्ष्मी का स्वरूप मानकर घर में सुरक्षित रखती हैं। दीपावली पर लक्ष्मी पूजन के दिन इनकी भी विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है।
एक ओर जहां बदलते समय के साथ धनतेरस पर बाजारों में सोने-चांदी, बर्तन, वाहन और इलेक्ट्रॉनिक सामान की खरीदारी का चलन बढ़ा है, वहीं दूसरी ओर नीमच में निभाई जा रही यह परंपरा लोगों को अपनी मिट्टी, संस्कृति और पूर्वजों से मिली धार्मिक विरासत से जोड़े हुए है।
यह परंपरा भारतीय संस्कृति की उस खूबसूरती को दर्शाती है, जिसमें समय और दौर बदलने के बावजूद आस्था और परंपराओं की जड़ें आज भी मजबूत बनी हुई हैं। धनतेरस पर निभाई जाने वाली इस अनूठी परंपरा का नजारा हमारे कैमरे में भी कैद हुआ।