निम्बाहेड़ा। इस बार मकर संक्रांति का वाहन व्याघ्र यानि बाघ है और उपवाहन घोड़ा, अस्त्र गदा, दृष्टि ईशान, करण मुख दक्षिण, वारमुख पश्चिम और भगवान आदित्य बैठकर पीला वस्त्र धारण किए हुए संक्रमण करेंगे।
श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ मृत्युञ्जय तिवारी ने बताया कि भारतीय पंचांग के अनुसार संक्रांति का आगमन पीत वस्त्र, पर्ण कंचुकी, कंगन, जातिपुष्प धारण किए कुमार्यावस्था में कुमकुम लेपन कर गदा लिए रजत पात्र में पायस भक्षण करते पश्चिमाभिमुख उत्तर दिशा की और गमन करते हो रहा है। मकर संक्रांति 2023 की अवस्था भोग, स्थिति बैठी, पुष्प जटी और भोजन पात्र चांदी है। मकर संक्रांति भारत वर्ष का प्रमुख त्योहार माना जाता है। भारत के अलग-अलग राज्यों में मकर संक्रांति को विभिन्न नामों से जाना जाता है। इस त्योहार को गुजरात में उत्तरायण, पूर्वी उत्तर प्रदेश में खिचड़ी और दक्षिण भारत में इस दिन को पोंगल के रूप में मनाया जाता है। मकर संक्रांति का पर्व सूर्य के राशि परिवर्तन के मौके पर मनाया जाता है। इस दिन सूर्यदेव धनु राशि से निकलकर मकर में प्रवेश कर जाते हैं। सूर्य का मकर राशि में प्रवेश करना मकर संक्रांति कहलाता है। इसी दिन दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि की राशि में विराजमान हैं। माना जाता है कि जब शनि देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो तिल और गुड़ से सूर्य की पूजा करते हैं।
सूर्य का मकर राशि में प्रवेश-
रात्रि 08 बजकर 57 मिनट (14 जनवरी 2023), मकर संक्रांति पुण्यकाल- 07.17 पूर्वाह्न- 5.55 अपराह्न (15 जनवरी, 2023), अवधि- 10 घंटे 38 मिनट, मकर संक्रांति महा पुण्यकाल- प्रातः 07.17- प्रात: 9.04 (15 जनवरी, 2023), अवधि- 01 घंटा 46 मिनट।
मकर संक्रांति का महत्व-
डॉ तिवारी के अनुसार पुण्य और महापुण्य के समय के रूप में मकर संक्रांति का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन से स्वर्ग के द्वार खुल जाते हैं। जो मनुष्य मकर संक्रान्ति के पावन और महापुण्य काल में गंगा में स्नान करता है, वह सात जन्मों के पापों को धोकर स्वर्ग में स्नान करता है। इस दिन सब्जी, अनाज, तिल, गुड़, वस्त्र, कंबल का दान करने से शनि और सूर्य की कृपा प्राप्त होती है।
मकर संक्रांति का आयुर्वेदिक महत्व-
धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व के अलावा मकर संक्रांति का आयुर्वेदिक महत्व भी है। संक्रांति को खिचड़ी भी कहते हैं। इस दिन चावल, तिल और गुड़ से बनी चीजें खाई जाती हैं। तिल और गुड़ से बनी चीजों का सेवन स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है। इन चीजों के सेवन से इम्यून सिस्टम भी मजबूत होता है।
मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी खाने की परंपरा होती है, इसलिए मकर संक्रांति के पावन पर्व को खिचड़ी भी कहते हैं। हालांकि इस दिन खिचड़ी खाने की एक वजह ये भी होती है कि मकर संक्रांति में फसल की कटाई होती है। चावल और दाल से बनी खिचड़ी का सेवन सेहत के लिए फायदेमंद होता है। ये पाचन तंत्र को मजबूत करती है।
मकर संक्रांति से बदलता है वातावरण-
मकर संक्रांति के बाद से वातावरण में बदलाव आ जाता है। नदियों में वाष्पन की प्रक्रिया शुरू होने लगती है। इससे कई सारी बीमारियां दूर हो जाती हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक, सूर्य के उत्तरायण होने से सूर्य का ताप सर्दी को कम करता है।
सभी राशियों पर प्रभाव-
मेष राशि- मान-सम्मान और प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।
वृषभ राशि- वाद-विवाद की संभावना है। इससे मानसिक कष्ट हो सकता है।
मिथुन राशि- कोर्ट-कचेहरी के मामलों से कष्ट मिले सकता है। धन खर्च के योग हैं।
कर्क राशि- दांपत्य जीवन कष्टकारी हो सकता है। मानहानि की संभावना है।
सिंह राशि- शत्रुओं पर विजय मिल सकती है। रोगों से मुक्ति मिलेगी।
कन्या राशि- कार्यस्थल पर उच्चाधिकारियों से तनाव मिल सकता है।
तुला राशि- जमीन जायदाद के मामलों में सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
वृश्चिक राशि- इन्हें तरक्की के अवसर मिलेंगे और आय में वृद्धि होगी।
धनु राशि- धन हानि के योग हैं। सर और आँख में पीड़ा हो सकती है ।
मकर राशि- मान-सम्मान में वृद्धि और धन लाभ के योग हैं।
कुंभ राशि- यश और प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। यात्रा के भी योग हैं।
मीन राशि- धन, प्रमोशन और सम्मान मिलने की संभावना है।