नीमच। राष्ट्र संत ललितप्रभ सागरजी महाराज और डॉ मुनि शांतिप्रिय सागर महाराज सोमवार को नीमच पहुंचें। आप अपनी अमृतवाणी से सर्वसमाज के लोगों को जीवन जीने की कला के बारे में बता रहे है।
नीमच के दशहरा मैदान स्थित टाउन हॉल में आज आपने विशेष प्रवचन मैं कहा कि सुधारने का काम बंद कीजिए और सुधरने का काम शुरू कीजिए। आपने कहा कि यूं तो हम इंसान हैं, मिल जाए तो भारत है। हम पन्ने हैं मिल जाए तो किताब है। हम धागे हैं, मिल जाए तो चादर है। आपने लोगों को सीख दी कि जिंदगी में आह नहीं वाह करिए। जीवन को दुख भरा या सुखमय जीना हमारे हाथ में हैं। प्रभु ने जो दिया है वह भाग्य से बहुत ज्यादा दिया है। प्रभु का हमेशा शुक्र कीजिए। आपने कहा कि इंसान को वर्तमान का आनंद लेना चाहिए।
बताते चलें कि परम पूज्य ललितप्रभ सागर जी महाराज ने अब तक देश के 21 राज्यों में 50,000 किलोमीटर की पदयात्रा करके हजारों परिवारों को स्वर्ग सरीखा बनाने और हजारों युवाओं को व्यसन मुक्त, शाकाहार और आत्मविश्वास से भरपूर जीवन जीने हेतु प्रेरित किया है।आपके प्रवचन का आयोजन कल भी टाउन हॉल नीमच में प्रातः 9 बजे से होगा।