नीमच। विधानसभा चुनाव से पहले मतदाताओं का मूड जानने के लिए वॉईस ऑफ एमपी की चुनावी यात्रा नीमच, मंदसौर व रतलाम जिले के नगर-नगर व गांव-गांव पहुंच रही है। इसी कड़ी में वॉईस ऑफ एमपी की चुनावी यात्रा मंदसौर जिले की गरोठ विधानसभा क्षेत्र के गरोठ पहुंची। यहां स्थानीय बस स्टैंड पर वॉईस ऑफ एमपी की टीम ने बीजेपी व कांग्रेस के पदाधिकारियों से अब तक हुए विकास व विकास के वादों को लेकर चर्चा की। साथ ही इस चुनाव में मतदान करने से पहले मतदाताओं का मूड भी जाना।
18 साल से विकास की राह देख रहा गरोठ-
गरोठ विधानसभा क्षेत्र पिछले 18 साल से विकास की बाट जो रहा है। क्षेत्र में जब से भाजपा की सरकार है तभी से हर तबका परेशान है। भाजपा के विधायक निष्क्रिय है। उनकी कोई बड़ी उपलब्धि क्षेत्र में दिखाई नहीं देती है। नगर में जो बस स्टैंड है वह कांग्रेस की देन है। कांग्रेस के शासन काल में नगर को बस स्टैंड के अलावा अस्पताल व औद्योगिक क्षेत्र की सौगात मिली थी। नगर का शिवनारायण कॉलेज भी कांग्रेस के शासन काल में ही अस्तित्व में आया था। चंबल का पानी अब क्षेत्र में पहुंचा है इसका कारण भी गांधी सागर बांध के निर्माण के समय हुआ समझौता है। उस समय ये समझौता हुआ था कि निर्माण के बाद 45 साल तक गांधी सागर का पानी राजस्थान को मिलेगा। इसके बाद मप्र को। इसीलिए कांग्रेस के समय में गांधी सागर का पानी क्षेत्र में नहीं पहुंच सका। स्वास्थ्य, शिक्षा व बेरोजगारी के मामले में वर्तमान सरकार फेल हो रही है। नगर के अस्पताल को रैफरल हॉस्पिटल के नाम से पहचाना जाता है। भाजपा के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित कई दिग्गज नेता गरोठ को जिला बनाने की घोषणा कर चुके हैं। लेकिन स्थानीय जनप्रतिनिधि की निष्क्रियता से अभी तक भी गरोठ को जिले का सौभाग्य प्राप्त नहीं हुआ है। कोरोना काल में जब महिलाएं संकट में थी तो भाजपा की सरकार ने गैस सिलेंडर के दाम कम नहीं किए और आज जब मामा संकट में हैं तो लाडली बहना गैस सिलेंडर योजना चला दी। वर्तमान में अल्प वर्षा की वजह से किसानों की फसलें बर्बाद हो गई है। लेकिन अभी तक भाजपा का कोई भी नेता खेतों तक नहीं पहुंचा है और ना ही मुआवजा देने का ऐलान किया है। जबकि कमल नाथ सरकार ने किसानों को बिना सर्वें के मुआवजा बांटा था। कांग्रेस के विधायक सुभाष कुमार सोजतिया ने क्षेत्र में विकास की बाढ़ ला दी थी। उस समय जब नगर को बस स्टैंड की सौगात मिली थी तो वह बस स्टैंड पूरे उज्जैन संभाग का सबसे बड़ा बस स्टैंड था। पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन ने कृषि मंडी निधि से 120 किमी का रोड बनवाया था जो आज भी टोल फ्री है। वर्तमान विधायक धाकड़ खुद के क्षेत्र में एक रोड़ तक नहीं बनवा पाए।
भाजपा ने खेतों तक पहुंचाया गांधी सागर का पानी-
भाजपा सरकार ने विधानसभा क्षेत्र गरोठ में चहुंमुखी विकास किया है। प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत आज गांव-गांव तक पक्की सड़कों का निर्माण हुआ है। शिक्षा के क्षेत्र में हमारा नगर लगातार प्रगति कर रहा है। दो सीएम राइज स्कूल भी बन रहे हैं। नगर को 100 बेड के अस्पताल की सुविधा मिली है। चिकित्सकों द्वारा मरीजों का उपचार किया जा रहा है। कांग्रेस के शासन में सिर्फ अस्पताल थे, लेकिन आज अस्पतालों में आधुनिक मशीनें है, जिनकी सहायता से गंभीर से गंभीर बीमारी का समय से पता किया जा रहा है। भाजपा की सरकार ने गांधी सागर बांध के पानी को क्षेत्र तक पहुंचाया है। आज किसानों के खेतों में सिंचाई के लिए भरपूर पानी पहुंच रहा है। कांग्रेस के दिग्विजय सिंह की सरकार ने प्रदेश का बंटाधार कर दिया था। बिजली कब आती थी, इसका किसी को कोई पता नहीं रहता था, लेकिन आज 24 घंटे बिजली मिलती है। किसान भाईयों को सिंचाई के लिए 12 घंटे बिजली की आपूर्ति की जाती है। प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान ने बीमारू राज्य को आज अन्य विकसित राज्यों की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया है। हमारा प्रदेश व नगर लगातार विकास की नई ईबारत लिख रहा है। किसानों व महिलाओं के लिए सीएम शिवराज ने कई योजनाएं चलाई है। इन योजनाओं का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंच रहा है। आज क्षेत्र से होकर 8 लेन व 4 लेन गुजर रहा है। रोड कनेक्टिविटी में क्षेत्र बहुत आगे हैं। विधायक धाकड़ लगातार क्षेत्र में विकास कार्य करा रहे हैं। जल्द ही गरोठ को जिला बनाने की दिशा में भी उचित पहल की जाएगी। भाजपा के कार्यकाल में ही गरोठ को जिला बनाने की पहल होगी। अस्पताल भवन के निर्माण के लिए 24 करोड़ रूपये स्वीकृत हुए हैं। कांग्रेस के समय में क्षेत्र में सड़कों का अभाव था। मुख्य मार्गों व बाजारों में सड़कें गड्ढों में तब्दिल हो चुकी थी। ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचने का मार्ग भी जर्जर व खस्ताहाल स्थिति में था। लेकिन आज क्षेत्र की सूरत बदल गई है। गांव-गांव व गली-गली में पक्की सड़कों का निर्माण हुआ है। घर-घर पेयजल पहुंच रहा है। आज दिल्ली से 100 रूपये निकलते हैं तो पूरे 100 रूपये हितग्राही के बैंक खाते में पहुंचते हैं। पहले कांग्रेस की सरकार के समय दिल्ली से 100 रूपये निकलते थे तो वह हितग्राही तक पहुंचते-पहुंचते 10 रूपये में बदल जाते थे।
मतदाताओं के बोल-
गरोठ को जिला बनाने की मांग लंबे समय से की जा रही है। गरोठ का आम नागरिक इसकी लड़ाई लड़ रहा है। इस मांग के चलते लोग जेल तक जा चुके हैं, लेकिन अभी तक गरोठ को जिला बनने का सौभाग्य नहीं मिला है। इसके पीछे की वजह सीधे तौर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि है, जिनकी निष्क्रियता से ही भाजपा की 18 साल की सरकार ने गरोठ को अब तक जिला घोषित नहीं किया है। कांग्रेस-भाजपा दोनों ही पार्टी ने कई विकास के कार्य किए हैं। कई विकास कार्य अभी भी होना बाकी है। क्षेत्र का शिक्षित युवा बेरोजगार है। अस्पताल की सुविधा व उच्च स्तर की पढ़ाई के लिए आज भी बाहर जाना पड़ता है। इस बार गरोठ को जिला बनाने का वादा करने वाले प्रत्याशी को ही चुनकर भोपाल भेजेंगे।