डेस्क। मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोरो शोरो से चल रही है। यहां राजनीतिक पार्टियां भी पूरी तरह से चुनावी मूड में आ चुकी हैं। वहीं अब कुछ ही दिनों में चुनाव आयोग भी चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर सकता हैं। भाजपा ने प्रदेश में अभी तक तीन लिस्ट मिलाकर कुल 79 विधानसभा उम्मीदवारों की घोषणा कर दी हैं। भाजपा की तरफ से सबसे चौंका देने वाली लिस्ट दूसरी हैं। जिसमें तीन केंद्रीय मंत्रियों सहित सात सांसदों और दिग्गज नेता कैलाश विजयवर्गीय को विधानसभा उम्मीदवार बनाया हैं।
राजनीतिक जानकर इस दूसरी लिस्ट से काफी हैरत में हैं। कई लोगों का कहना हैं कि भाजपा की स्थिति प्रदेश में ठीक नहीं हैं। इसी कारण केंद्रीय नेतृत्व ने बड़ा दाव खेला हैं। नरेंद्र सिंह तौमर, प्रहलाद पटेल, कैलाश विजयवर्गीय व फग्गन सिंह कुलस्ते सहित अन्य सात सांसदों को विधानसभा का टिकिट देकर भाजपा प्रदेश में डैमेज कंट्रोल कर रही हैं।
वहीं कुशल राजनीतिक चाणक्यों का मानना है कि भाजपा एमपी में गुजरात मॉडल की तर्ज पर विधानसभा चुनाव लड़ना चाह रही हैं। अगर भाजपा नेतृत्व गुजरात मॉडल पर विधानसभा चुनाव लड़ती हैं तो आने वाली विधानसभा उम्मीदवारों की सूची में और भी कई रोचक नाम सामने आ सकते हैं।
भाजपा की दूसरी सूची को लेकर प्रदेश कांग्रेस ने इसे भयभीत सूची करार दिया हैं। कांग्रेस नेताओं का मानना हैं कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व ये मान चुका हैं कि प्रदेश में भाजपा की विधानसभा चुनाव में एक करारी हार होने वाली हैं, जिसको लेकर केंद्रीय नेतृत्व ने बड़े नेताओं को टिकिट दिया हैं।
कांग्रेस के पक्ष में लहर- दिग्विजय सिंह
वहीं दूसरी लिस्ट को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्गी राजा ने कल उज्जैन महाकाल के दर्शन करने के बाद मीडिया के सामने कहा कि भाजपा ने वो प्रयोग जो गुजरात में किया था, कि सारे मिनिस्टर, सब के टिकट काट दिए, वो प्रयोग यहां भी हो सकता है। इसका मतलब ये होगा कि मुख्यमंत्री से लेकर जितने मंत्री हैं, सबके भी टिकट कट सकते हैं। लेकिन इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। जनता मन बना चुकी है। कांग्रेस के पक्ष में लहर है।
कई मंत्री व दिग्गज नेताओं के कट सकते हैं टिकट-
भाजपा का शीर्ष नेतृत्व अगर वाकई में गुजरात मॉडल पर एमपी में विधानसभा चुनाव लड़ने का मानस बना चुका हैं तो आने वाले दिनों में कई बड़ी घटनाएं सामने आने वाली हैं। क्योंकि गुजरात विधानसभा चुनाव के समय भाजपा ने गुजरात के कई बड़े मंत्रियो के टिकिट काट दिए थे। यहां तक कि मुख्यमंत्री विजय रुपाणी को चुनाव के ऐनवक्त पर पद से हटा दिया था। भाजपा शीर्ष नेतृत्व के इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों में भूचाल सा ला दिया था। खेर इसका परिणाम भाजपा के पक्ष में रहा और भाजपा ने गुजरात चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी।
अब देखना हैं कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व अगर एमपी में भी गुजरात मॉडल लागू करता हैं तो प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के विधानसभा चुनाव लड़ने पर एक बड़ा संशय पैदा होता हैं। वहीं वर्तमान में जो प्रदेश की केबिनेट हैं उसमें से कई विधानसभा उम्मीदवारों को लेकर बड़ा बदलाव हो सकता हैं।