रतलाम। आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद रतलाम जिले में पुलिस और एफएसटी की अलग-अलग कार्यवाहियों में 25 करोड रुपए मूल्य के सोने चांदी के आभूषण और कैश जप्त हो चुका है। यह जप्त की गई राशि प्रदेश में सबसे अधिक है । कार्यवाही जिले में हाईवे एवं राजस्थान राज्य की सीमाओं पर बनाए गए चेक पोस्ट पर चेकिंग के दौरान अब तक 24 करोड रुपए मूल्य के सोने चांदी के आभूषण एवं लाखों रुपए नगद बरामद किए गए हैं। रतलाम पुलिस अधीक्षक राहुल कुमार लोढा ने बताया कि सभी चेक पोस्ट पर लगातार चेकिंग की जा रही है। जिसमें इतनी बड़ी मात्रा में नगद और सोना चांदी अवैध रूप से परिवहन करते हुए पकड़े गए हैं। इन मामलों में प्रकरण दर्ज करने के साथ ही आयकर विभाग और जीएसटी को भी जानकारी भेजी गई। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि चेकिंग के दौरान ले जाए जा रहे नगद या सोने चांदी के आभूषण को लेकर दस्तावेज और हिसाब प्रस्तुत करने पर जप्त किया गया माल रिलीज भी किया जा रहा है। इसमें आम नागरिकों और व्यापारियों को परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। उनके द्बारा जो भी कैश अथवा ज्वेलरी परिवहन कर ले जाइ जा रही है उससे संबंधित दस्तावेज आवश्यक रूप से साथ रखने पर परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
एसपी राहुल कुमार लोढा ने बताया कि पुलिस ने दौरान नगद राशि भी जप्त की है। माणक चौक थाना क्षेत्र स्थित सांवरिया ट्रेडर्स पर कार्यवाही के दौरान 21 लाख 88 हजार 900 रुपए नगद बरामद हुए है। आरोपी पिता पुत्र पुरुषोत्तम और संजय मोतीयानी रुपए का हिसाब नहीं दे सके। इस मामले का कनेक्शन वायदा कारोबार और हवाला से जुड़ा हुआ है। जिसकी इन्वेस्टिगेशन पुलिस कर रही है।
बड़ी मात्रा में पकड़ाया सोना और चांदी
सरवन थाने के कुंदा चेक पोस्ट पर चेकिंग के दौरान पुलिस ने 13 करोड़ 80 लख रुपए के सोना चांदी के आभूषण पकड़े हैं। यह माल इंदौर से बांसवाड़ा ले जाया जा रहा था। 3 दिन पहले भी राजस्थान की दानपुर बॉर्डर पर 14 करोड रुपए के सोने चांदी के जेवरात पकड़े गए थे। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार पकड़े गए सोने चांदी की अधिकांश ज्वेलरी रतलाम के प्रसिद्ध डीपी ज्वेलर्स फर्म की है। 2 दिन पूर्व ही राजस्थान की सीमा में दानपुर क्षेत्र में 14 करोड़ मूल्य के सोने चांदी के जेवराज जप्त किए थे। वहीं, इस मामले में भी रतलाम के प्रसिद्ध डीपी ज्वेलर्स के ही सोने और चांदी के आभूषण एसएसटी की टीम ने जप्त किए हैं। मामला टैक्स चोरी और आयकर से जुड़ा होने से पूरे मामले को जीएसटी और आयकर विभाग को सौंपा गया है।