उज्जैन। अयोध्या में राम मंदिर बनकर तैयार है और इसका इतिहास भी बड़ा गर्व भरा है लेकिन इस इतिहास से उज्जैन के तराना निवासी 200 लोगों का सीधा टच है ऐसे में अब इन लोगों की मांग है कि मूर्ति स्थापना में इन्हे भी मौका मिलें, जिसें लेकर आज जानकारी देते हुए हिन्दू सिंह गुर्जर ने बताया कि दिसम्बर 1992 को अयोध्या कारसेवक पहुचे थे और लगातार 10 दिन वहां प्रवचन में हिस्सा लेकर सरयु नदी के किनारे बालूरेत लेकर रामलला के मंन्दिर पहुंचे थे और बाबरी मस्जिद की तीन दिवारों को फादते हुए मुख्य द्वार तक पहुंचे थे जहां रामलला विराजित थे वहां पहुंचने पर गार्ड ने रामलला के बाबरी मस्जिद के मलबे में दब जाने की आशंका जताते हुए उनको वहां से बाहर निकालने के लिये कहा तब हमने रामलला को वहां से सुरक्षित उठाकर समीप में स्थित नीम के पेड़ के नीचे स्थापित किया इस दौरान रामलला के पास रखा हुआ कलश जिसमें से हमने पानी पिया। कार सेवक बाबरी मस्जिद के ढ़चे पर पहुचे और उसे ढहाया और इस दौरान मुझे और मेरे साथी को चोट आयी और हमे फेजाबाद के अस्पताल में भर्ती करवाया गया जहां हमारा ईलाज किया गया और इसके बाद वहां के स्थानीय प्रशासन ने हमे पुनः ढाचे के पास छोड़ दिया । रामलला का भव्य मंदिर अब बन गया है और जनवरी में इसका उद्घाटन किया जाना है ऐसे में हम सभी कार सेवक एक बार पुनः रामलला के दर्शन के लिये अधिक से अधिक संख्या में वहां पहुंचेगे।