खरगोन में संस्कृति, प्रकृति, संविधान और लोकतंत्र संरक्षण का संदेश लेकर संविधान निर्माता बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की जन्मस्थली महू से शुरू हुई यात्रा बुधवार को शहर पहुंची। यहां बाबा साहेब की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर यात्रा आगे बढ़ी। यात्रा संयोजक सेवानिवृत्त सेलटैक्स अधिकारी व समाजसेवी पोरलाल खरते ने बताया लगातार दूसरे वर्ष यह यात्रा निकाली जा रही है। इन चारों संदेशो को लेकर संवेदनायें कम हो रही है। इन चारों विषयो के बारे में लोगो को जागरूक करने के उद्देश से यह यात्रा निकाली जा रही है यह किसी एक समाज के लिये नही बल्कि समूचे समाज के अधिकारों, लोकतंत्र संरक्षण के लिये है। जयस संरक्षक राजेन्द्र पंवार ने यात्रा का स्वागत करते हुए बताया कि समाजहित को लेकर निकाली जा रही यह यात्रा सराहनीय है। हम मांग करते है कि वह अपने आंदोलन में छत्तीसगढ़ के हसदैव जंगलो को जिस तरह विकास के नाम पर उजाड़ा जा रहा है उसे भी दादर में होने वाले आदिवासी सम्मेलन में जंगलो की कटाई के विरोध में प्रस्ताव लाकर सरकार का ध्यान आकर्षित कराए। यह यात्रा राजपुर, नागझिरी, रूपखेड़ा, सोलना, घुघरियाखेड़ी, बिलाली, दसनावल, रेटवा, ढाबला होते हुए आगे खेतिया पानसेमल की ओर आगे बढ़ेगी। यात्रा का समापन दादरा नगर हवेली में होगा। यात्रा में शामिल लोग 13 जनवरी को आदिवासी एकता परिषद के आदिवासी सांस्कृतिक एकता महासम्मेलन में शामिल होंगे।